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छुट्टा पशु छोड़ने वालों पर कसेगा शिकंजा: ऐप से होगी पशुओं की पहचान, QR कोड से पकड़े जाएंगे मालिक

Published: Sun, 18 Oct 2026 09:35 AM (IST)

मैनपुरी में भारत पशुधन ऐप के माध्यम से गोवंश की डिजिटल पहचान की जाएगी। इससे दूध निकालने के बाद पशुओं ...और पढ़ें

बेवर क्षेत्र के गांव घुटारा में गाय से दूध निकालती महिला। जागरण

बेवर क्षेत्र के गांव घुटारा में गाय से दूध निकालती महिला। जागरण 

HighLights

  1. भारत पशुधन ऐप से गोवंश की डिजिटल पहचान होगी।

  2. इयर टैग पर क्यूआर कोड से मालिक का ब्योरा मिलेगा।

  3. बेसहारा गोवंश की समस्या पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

जागरण संवाददाता, मैनपुरी। दूध निकालने के बाद गोवंश को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों की अब आसानी से पहचान हो सकेगी। पशुओं की खरीद-बिक्री से लेकर उनकी पहचान तक के लिए डिजिटल निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए भारत पशुधन एप पर पंजीकरण और इयर टैगिंग कराई जाएगी। टैग पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पशु और उसके पंजीकृत पशुपालक का ब्योरा सामने आ जाएगा।

इतना ही नहीं नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन के तहत पशुओं के लेन-देन का रिकॉर्ड भी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे बेसहारा गोवंशों की समस्या पर अंकुश लगाने और पशुओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।

खरीद-बिक्री का ब्योरा पोर्टल पर होगा अपलोड

जिले में पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1,38,594 गोवंशी और 5,88,967 महिषवंशी दर्ज हैं। दूध न देने वाले या दूध निकालने के बाद कई पशुपालक गोवंश को खुला छोड़ देते हैं। इससे फसलों को नुकसान के साथ सड़क हादसों का खतरा भी रहता है। डिजिटल निगरानी से ऐसे पशुओं के मालिकों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

गांव से जिला स्तर तक बनेंगी समितियां

व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए गांव, ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। ग्राम स्तर पर पंचायत सहायक, ब्लाक स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारी और तहसील स्तर पर एसडीएम की देखरेख में निगरानी होगी। जिला स्तर पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे।

ग्राम पंचायतें पशुओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखेंगी। सीवीओ डॉ. सऊद हसन ने बताया कि एप पर पंजीकरण कर प्रक्रिया एक नवंबर से शुरु होगी, अभी तैयारी की जा रही है।

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2230 गोवंशी सहभागिता योजना के तहत पशुपालकों के सिपुर्द

गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सहभागिता योजना के तहत जिले में 2230 गोवंशी पशुपालकों के सिपुर्द किए गए हैं। योजना के तहत प्रत्येक गोवंशी के चारा-पानी के लिए पशुपालक को 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। हर माह गोवंशों का सत्यापन कराया जाता है। ब्लॉक व नगर निकाय की टीम सत्यापन के बाद रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजती है। सत्यापन के बाद ही निर्धारित धनराशि का भुगतान किया जाता है।