जासं, मैनपुरी: छात्रा दुष्कर्म-हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद नई विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया है। इसमें एडीजी कानपुर जोन भानु भाष्कर के अलावा एसटीएफ के एएसपी राकेश कुमार को भी शामिल किया गया है। पूर्व एसआइटी अध्यक्ष और कानपुर रेंज के आइजी मोहित अग्रवाल और एसपी मैनपुरी भी टीम सदस्य हैं। पुलिस महानिदेशक शुक्रवार को एसआइटी के साथ बैठक करेंगे। संभावना है कि एसआइटी शाम तक मैनपुरी आ जाएगी।

मामले में हाई कोर्ट ने जांच के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है। नई एसआइटी को जहां इस अवधि में जांच पूरी करनी होगी वहीं, घटना से पर्दा उठाने की चुनौती भी होगी। डीजीपी मुकुल गोयल शुक्रवार को लखनऊ में एसआइटी के साथ बैठक करेंगे। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस बैठक में जांच की दिशा तय कर दी जाएगी। इसके बाद एसआइटी मैनपुरी आकर अपना काम शुरू कर देगी।

केस संबंधित संपूर्ण पत्रावली लेकर अधिकारी पहले से ही प्रयागराज चले गए थे। ये अधिकारी गुरुवार को वहां से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं। हाई कोर्ट ने डीजीपी को मामले की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। ऐसे में नई एसआइटी की हर गतिविधि की लखनऊ तक नियमित जानकारी भेजी जाएगी।

जिस तारीख को घटना, उसी को कोर्ट का आदेश: 16 सितंबर, 2019 को छात्रा की हत्या की गई थी। इसे संयोग ही कहेंगे कि ठीक दो साल बाद 16 सितंबर, 2021 को उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया गया है।

अब तक की जांच: पुलिस भी करती रही विवेचना

एफआइआर दर्ज होते ही पुलिस जांच में जुट गई थी। एसआइटी जांच के बावजूद पुलिस की पड़ताल जारी रही। डीएनए और पालीग्राफी परीक्षण की कागजी कार्रवाई भी पुलिस ने कराई। हालांकि इस कवायद से भी घटना से पर्दा नहीं उठ सका।

तह तक न पहुंच पाई एसटीएफ:पुलिस के साथ ही एसटीएफ के सीओ श्यामकांत भी जांच में जुटे रहे। विद्यालय के छात्र, कर्मचारियों से पूछताछ की। आसपास के ग्रामीणों से बातचीत कर सुराग निकालने का प्रयास किया। लेकिन सफलता नहीं मिली।

पुरानी एसआइटी की मैराथन जांच रही बेनतीजा: पुरानी एसआइटी की जांच करीब पौने दो साल तक चली। इस दौरान एसआइटी के तीन सदस्य बदले गए। सबसे पहले एसपी अजय कुमार पांडेय ने जांच को आगे बढ़ाया। बाद में एसपी अविनाश पांडेय और फिर अशोक कुमार राय ने सुराग लगाने का प्रयास किया। इस दौरान करीब तीन सौ लोगों के बयान दर्ज किए गए। 115 के डीएनए और 12 के पालीग्राफी परीक्षण कराए गए। मगर, ये मैराथन जांच भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

जवाब मांगते सवाल

छात्रा का शव मिलने के बाद विद्यालय प्रशासन और पुलिस ने स्वजन को सूचना नहीं दी। स्वजन का आरोप था कि एक रिश्तेदार द्वारा अस्पताल में शव देखे जाने पर उनको जानकारी हुई।

अस्पताल में शव रखे होने के समय शरीर पर चोटें थीं। पंचनामा में भी चोटों का उल्लेख था। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख नहीं था।

स्वजन का आरोप था कि पोस्टमार्टम के दौरान छात्रा के प्राइवेट पार्ट पर खून के निशान मिले थे, जो दुष्कर्म की ओर इशारा कर रहे थे। पुलिस खून होने की वजह नहीं बता सकी।

घटना से एक दिन पहले छात्रा ने साथियों से कहा था कि वह अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटना सभी को एक साथ बताना चाहती है। छात्रा क्या बताना चाहती थी? इसका पता नहीं चला।

अगर घटना खुदकुशी थी तो छात्रा इसके लिए विवश क्यों हुई?

घटना वाली रात ढाई बजे तक छात्रा कमरे में टहलती रही। आशंका है कि कोई तो बात होगी जो उसे सोने नहीं दे रही थी। पुलिस ने इस तथ्य पर कुछ नहीं कहा।

छात्रा का बिसरा और स्लाइड सुरक्षित की गई थी। आरोप है कई बार अनुरोध के बाद भी पुलिस ने स्वजन को बिसरा, स्लाइड जांच के परिणाम की जानकारी नहीं दी।

शव का जलप्रवाह बना सबसे बड़ी गलती: छात्रा के शव का जलप्रवाह कराना पुलिस की सबसे बड़ी गलती रही। स्वजन के मुताबिक, वे शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहते थे, परंतु पुलिस-प्रशासन ने अन्य लोगों को दवाब में लेकर बिना उनकी मौजूदगी के शव का जलप्रवाह करा दिया।

Edited By: Jagran