संवाद सूत्र, श्रीनगर (महोबा): शिक्षा पाने की उम्र से ही विनोद पटैरिया को बीमारी ने घेरा तो उन्होंने योग की शरण ली। पहले इंटरनेट मीडिया की मदद से योग सीखने की कोशिश की। बाद में पतंजलि योग पीठ जाकर इसकी विधिवत शिक्षा ग्रहण की। वहां से लौटने के बाद उनका एक ही मिशन था कि इस विद्या को गांव-गांव जाकर घर-घर तक पहुंचाना। उनका यह अभियान आज भी जारी है।

कबरई ब्लाक के पिपरामाफ निवासी 35 वर्षीय विनोद पटैरिया वर्तमान में कंचनपुरा प्राथमिक स्कूल में शिक्षा मित्र के पद पर तैनात हैं। वह कहते हैं कि उन्हें 2004 के करीब सर्दी जुखाम की शिकायत रहती थी। कई दवा की लेकिन फायदा नहीं हुआ। टीवी पर योग का प्रसारण देख कर उन्होंने योग सीखना प्रारंभ किया। उन्हें फायदा मिला। इस पर इन्होंने हरिद्वार जाकर योग की और भी विद्याएं सीखने का संकल्प लिया। 2006 में पहुंचे हरिद्वार

2006 में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार जाकर योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में योग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। छह माह बाद प्रशिक्षण प्राप्त करके अपने गृह जनपद लौट आए। इस युवा ने हरिद्वार में ही संकल्प लिया कि अपने पूरे जिले को योग मय में बनाने में पूरी शक्ति लगा दूंगा।

गांव-गांव लगाया कैंप

महोबा जिले के एक एक गांव में जाकर पांच दिवस के योग कैंप लगाए। लोगों को विभिन्न बीमारियों से गैस कब्ज एसिडिटी शुगर बीपी के मरीजों को योग से ठीक किया। स्कूलों में बच्चों को उनके बौद्धिक विकास के लिए योग के विभिन्न आसन सिखाए। इन्हें मिली राहत

- श्रीनगर के अशोक कुमार के पेट में पांच साल पहले करीब ढाई किलो का ट्यूमर था, योग के माध्यम से ही वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए। आपरेशन भी नहीं कराया।

- राम आसरे विश्वकर्मा हृदय रोग से पीड़ित थे, दवा के लिए पैसे नहीं थे, विनोद से सीखी योग विद्या से वह स्वस्थ हो गए।

- पिपरामाफ निवासी हरिनारायण रिछारिया के लीवर में कैंसर था, योग के माध्यम से ही उस पर विजय पा ली। यहां कर चुके आयोजन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को सरस्वती विद्या मंदिर महोबा एवं स्पो‌र्ट्स स्टेडियम महोबा में हजारों लोगों को एक साथ योगभ्यास करवाते रहे हैं। 21 जून 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में देहरादून में भी योगभ्यास करवाया। महामारी के दौरान फेसबुक व्हाट्सएप और यू-ट्यूब से जनमानस को योगाभ्यास सिखाया।

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