सोहगीबरवा में बढ़ेगा गौर का कुनबा, दूसरे वन क्षेत्रों से लाने की तैयारी
सोहगीबरवा जंगल में गौर (भारतीय बाइसन) की संख्या बढ़ाने की तैयारी है, जिसके लिए वन विभाग दक्षिण, मध्य और उत्तर ...और पढ़ें

लगभग एक माह से निचलौल जंगल में गौर के रहने से उत्साहित विभाग ने लिया निर्णय। जागरण
HighLights
सोहगीबरवा जंगल में गौर (भारतीय बाइसन) की संख्या बढ़ाने की तैयारी।
वन विभाग दक्षिण, मध्य और उत्तर पूर्व भारत से गौर लाएगा।
इससे बाघों-तेंदुओं को भोजन, जंगल की जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। सोहगीबरवा जंगल में गौर (भारतीय बाइसन) का कुनबा एक बार फिर बढ़ने जा रहा है। वन विभाग ने दक्षिण, मध्य और उत्तर पूर्व भारत के वन क्षेत्रों से गौर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नेपाल से आए गौर के लगभग एक माह से सोहगीबरवा जंगल में रहने के बाद विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
विभाग का मानना है कि पहले सोहगीबरवा जंगल में गौर की संख्या अधिक थी, लेकिन अनुकूल वातावरण न मिलने के कारण वे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के चितवन नेशनल पार्क की ओर चले गए। पिछले चार दशकों में जंगल में गौर की कोई मौजूदगी नहीं मिली है। नेपाल से आए गौर को लेकर विभाग उत्साहित है। यह गौर निचलौल रेंज में लगभग एक माह से प्रवास कर रहा है।
वनकर्मी लगातार जीपीएस लोकेशन के साथ इसकी फोटो मुख्यालय भेज रहे हैं। चार जुलाई को इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक को भेजी गई थी, जिसके बाद मुख्यालय ने सोहगीबरवा में गौर लाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फार नेचर) ने भी इसका संज्ञान लिया है।
सोहगीबरवा में वर्तमान में तीन बाघ और 116 तेंदुए हैं। शिकार को लेकर आपस में संघर्ष की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जंगल के समीप गांवों में मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं भी होती रहतीं हैं। वनकर्मियों का मानना है कि जंगल में गौर की संख्या बढ़ने से बाघ और तेंदुओं को पर्याप्त भोजन मिलेगा।
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दक्षिण, मध्य व उत्तर पूर्व भारत है गौर की बहुलता
गौर दक्षिण, मध्य और उत्तर पूर्व भारत में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। दक्षिण भारत में नागरहोल और बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान, वायनाड के जंगल, मध्य भारत में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व इसके महत्वपूर्ण केंद्र हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर के संरक्षित क्षेत्रों में भी गौर पाए जाते हैं। नेपाल के चितवन नेशनल पार्क में 368 गौर हैं। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में भी इसकी मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं।
नेपाल से आए गौर को यहां का वातावरण और जंगली घास पसंद आ रही है। विभाग का मानना है कि यदि दूसरे वन क्षेत्रों से गौर लाए जाएं, तो जंगल जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध होगा।
अनुकूल वातावरण और पर्याप्त आहार मिलने के कारण लगभग एक माह से गौर निचलौल रेंज के जंगल में प्रवास कर रहा है। वनकर्मियों द्वारा लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। जंगल में दूसरे वन क्षेत्र से लाकर और गौर छोड़े जाने की योजना है। इस संबंध में प्रस्ताव बना कर शीघ्र ही मुख्यालय प्रेषित किया जाएगा।
