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आस्था, संघर्ष और गुरु-भक्ति की मिसाल, दौड़ कर महराजगंज से पटना पहुंची रोमा गुप्ता

Published: Sun, 25 Jan 2026 02:45 PM (IST)

रोमा गुप्ता ने अपने आदर्श शिक्षक खान सर का आशीर्वाद पाने के लिए महराजगंज से पटना तक 277 किमी की ...और पढ़ें

खान सर के आशीर्वाद के लिए महराजगंज से पटना तक दौड़ कर चलीं एथलीट रोमा गुप्ता। जागरण

खान सर के आशीर्वाद के लिए महराजगंज से पटना तक दौड़ कर चलीं एथलीट रोमा गुप्ता। जागरण

HighLights

  1. रोमा गुप्ता ने खान सर के लिए 277 किमी दौड़ लगाई।

  2. महराजगंज से पटना तक की यात्रा आस्था का प्रतीक।

  3. गुरु-भक्ति में अपने रक्त से बनाई खान सर की तस्वीर।

संवाद सूत्र , सिंदुरिया। आस्था, संकल्प और गुरु-भक्ति की एक अनूठी कहानी इन दिनों महराजगंज से लेकर पटना तक चर्चा का विषय बनी हुई है। मिठौरा ब्लाक के जमुई पंडित की रहने वाली रोमा गुप्ता ने अपने आदर्श शिक्षक खान सर से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए महराजगंज से पटना तक दौड़ कर यात्रा करने का संकल्प लिया, गुरुवार को महराजगंज से दौड़ते हुए 277 किमी की दूरी को पूरा करते हुए शनिवार को वह पटना पहुंच गई है। यह यात्रा केवल सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संघर्ष, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास की जीवंत मिसाल बन गई है।

करीब 277 किलोमीटर की इस कठिन दौड़ के दौरान रोमा को असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। पैरों में छाले पड़ गए, थकान ने कई बार हौसले की परीक्षा ली, लेकिन उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा। दिन-रात लगातार चलते हुए उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और अंततः पटना पहुंचकर अपने लक्ष्य को पूरा किया।

रोमा का कहना है कि इस पूरे संघर्ष की दवा उन्हें खान सर का आशीर्वाद लगता है, जिससे मिलते ही उनके जीवन के संघर्षों को नई दिशा और नई उड़ान मिलेगी। शनिवार को पटना में पहुंचने के बाद रोमा गुप्ता ने अपने इंटरनेट मीडिया से वीडियो प्रसारित करते हुए कहा है, कि अब खान सर से मुलाकात के बाद ही उसके लक्ष्य की पूर्ति होगी।

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खुद के रक्त से बनवाया है खान सर की तस्वीर
इस यात्रा को और भी विशेष बनाता है, रोमा का अनोखा समर्पण। उन्होंने अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और आभार प्रकट करने के लिए अपने ही रक्त से एक तस्वीर तैयार की, जिसे वे खान सर को भेंट करना चाहती हैं। रोमा के अनुसार यह तस्वीर किसी सनसनी या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि गुरु-भक्ति, कृतज्ञता और प्रेरणा का प्रतीक है। उनका मानना है कि खान सर से मिली प्रेरणा ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना और कभी हार न मानना सिखाया।