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मिट्टी से निकलकर चमकी पुरातन धरोहर, जाली, टाइल्स और चबूतरों से सजे महाराजगंज के कुएं

Published: Mon, 12 Oct 2026 03:06 PM (IST)

निचलौल नगर पंचायत ने 15वें वित्त आयोग की धनराशि से 15 पुराने कुओं का सुंदरीकरण और संरक्षण किया है। इस ...और पढ़ें

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HighLights

  1. निचलौल में 15 पुराने कुओं का सुंदरीकरण और संरक्षण।

  2. 15वें वित्त आयोग की धनराशि से 14 लाख रुपये स्वीकृत।

  3. जल संरक्षण और पुरातन धरोहर को सहेजने की महत्वपूर्ण पहल।

प्रदीप कुमार गौड़, निचलौल। तेजी से बदलते शहरी परिवेश में उपेक्षित हो रहे पुराने कुओं को बचाने की पहल की गई है। निचलौल नगर पंचायत में 15वें वित्त आयोग की धनराशि से 15 कुओं का सुंदरीकरण और संरक्षण कराया गया है। कभी मिट्टी और कूड़े से पटने के कारण अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंचे इन कुओं को अब नया स्वरूप मिला है। इससे पुरातन धरोहर को सहेजने के साथ जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

नगर पंचायत अध्यक्ष शिवनाथ मद्धेशिया के पुत्र सुनील कुमार मद्धेशिया मुन्ना ने बताया कि नगर के विभिन्न वार्डों में दशकों पुराने कुएं उपेक्षा का शिकार थे। कई कुओं में मिट्टी और कूड़ा डालकर उन्हें पाट दिया गया था। इससे उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। इस समस्या को देखते हुए अध्यक्ष ने कुओं के संरक्षण और सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार कराकर बजट की व्यवस्था कराई। इस कार्य के लिए कुल 14 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।

इन वार्डों में हुआ सुंदरीकरण
नगर के पांडेय मोहल्ले में दो, महाशय मोहल्ले में एक, जिगनहवा में दो, घोड़हवा में दो, बरगदवा में दो, मियां मोहल्ले में दो, आजाद नगर में एक, हर्रेडीह में एक और मारवाड़ी वार्ड में दो कुओं का सुंदरीकरण कराया गया है। कुओं की सफाई के बाद उन पर जाली और टाइल्स लगाई गई। आसपास चबूतरे बनाकर बैठने योग्य स्थान भी तैयार किया गया है। सभी कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं।

धरोहर के साथ जल संरक्षण पर जोर
हर्रेडीह स्थित चंडी माता मंदिर और मियां मोहल्ले के शिव मंदिर परिसर में बाउंड्री बनाकर परिसर को सुरक्षित किया गया है। वहीं, दो स्थानों पर तीन-तीन फीट के छोटे मंदिर भी बनाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने कुओं को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और विरासत बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, भूजल संरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब कुओं की नियमित सफाई और देखरेख के साथ वर्षा जल को उनमें पहुंचाने की उचित व्यवस्था भी की जाए।

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