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नेपाल बाढ़ त्रासदी के दो माह बाद भी नहीं भरे जख्म, अपनों की राह देख रहे परिवार वाले

Published: Sun, 25 Oct 2026 08:31 PM (IST)

नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ और भूस्खलन के दो महीने बाद भी हजारों परिवार लापता अपनों की तलाश में ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नेपाल बाढ़ त्रासदी के दो माह बाद भी जख्म हरे।

  2. हजारों परिवार लापता स्वजन की तलाश में भटक रहे।

  3. कुश से प्रतीकात्मक शवों का अंतिम संस्कार कर रहे परिवार।

विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को दो माह हो चुके हैं, लेकिन त्रासदी के जख्म अब भी हरे हैं। जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए सड़कें, पुल और घर दुरुस्त किए जा रहे हैं। वहीं, हजारों परिवार अब भी अपने लापता स्वजन की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

जिनका कोई पता नहीं चला, उनमें से कुछ के स्वजन कुश से प्रतीकात्मक शव बनाकर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, आपदा में अब तक 1399 शव बरामद हुए हैं, जबकि 5200 लोग लापता हैं। इनमें 1294 अज्ञात शवों की पहचान नहीं हो सकी है।

उन्हें चितवन, नुवाकोट, रसुवा समेत विभिन्न स्थानों पर अस्थायी रूप से दफनाया गया है। डीएनए मिलान की धीमी प्रक्रिया से स्वजन की पीड़ा बढ़ रही है। दो माह में पहचान के बाद केवल 105 शव ही स्वजन को सौंपे जा सके हैं। बड़ी संख्या में नमूने लैब में हैं और मिलान में महीनों लगने की आशंका है।

पशुपतिनाथ के आर्यघाट पर जुट रहे स्वजन: बीते दिनों पशुपतिनाथ स्थित आर्यघाट पर बड़ी संख्या में लोगों ने धार्मिक विधि-विधान से लापता स्वजन की प्रतीकात्मक अंत्येष्टि की। शव पंजीकरण कार्यालय के कर्मचारी अनिश संगत के अनुसार, कुश से बने 350 से अधिक प्रतीकात्मक शवों का दाह संस्कार किया गया। दो अक्टूबर को एक साथ सबसे अधिक 100 प्रतीकात्मक शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार हुआ।

भोटेकोशी बाढ़ में माता-पिता को खो चुके नुवाकोट के बबिन रिजाल ने भी आर्यघाट पर कुश से बने प्रतीकात्मक शवों का अंतिम संस्कार किया। उनके माता-पिता बाढ़ के बाद से लापता हैं। उन्होंने बताया कि यह स्वजन को अंतिम श्रद्धांजलि देने का अवसर है, और आत्मा की शांति के लिए यही एक रास्ता भी।

त्रासदी के दौरान नेपाल पुलिस ने डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन प्रोटोकाल लागू किया था। दफनाने से पहले हर शव का डीएनए नमूना लिया गया। क्षतिग्रस्त चेहरों की फोटो, कपड़ों के निशान, कलाई पर बंधी घड़ी और हाथ पर बने टैटू की जानकारी भी संबंधित प्रहरी कार्यालयों में सुरक्षित रखी गई है, ताकि लोग आकर पहचान कर सकें।

प्रत्येक शव पर स्टील की प्लेट लगाकर नंबरिंग की गई है। ऊपर बोर्ड भी लगाया गया है। 12 साल तक स्वजन के आने पर डीएनए मिलान कर शव के अवशेष उन्हें सौंपे जाएंगे। डॉ. राजकुमार कार्की, फोरेंसिक विशेषज्ञ, काठमांडू

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