महराजगंज में रसोई से गायब हो रहे पारंपरिक कांसा और पीतल के बर्तन, आधुनिकता की दौड़ में सिमट रही पुरानी परंपरा
आधुनिकता की दौड़ में महराजगंज की रसोई से पारंपरिक पीतल और कांसे के बर्तन धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं, जिनकी ...और पढ़ें
-1793180672548_m.webp)
यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
आधुनिकता के कारण रसोई से पारंपरिक बर्तन गायब।
पीतल, कांसे की जगह स्टील, नॉनस्टिक का चलन।
सांस्कृतिक विरासत और पोषण महत्व पर असर।
संवाद सूत्र, लक्ष्मीपुर। आधुनिकता की दौड़ में घरों की रसोई से पारंपरिक धातुओं के बर्तन धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। कभी भारतीय परिवारों की पहचान रहे फूल (पीतल) और कांसे के बर्तनों की जगह अब स्टील, एल्युमिनियम और नॉनस्टिक बर्तनों ने ले ली है। सुविधाजनक और आकर्षक बर्तनों के बढ़ते चलन के बीच पुरानी परंपराएं भी सिमटती जा रही हैं।
एक समय था, जब घरों में बच्चों को कांसे की थाली में भोजन कराया जाता था। पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल खाना परोसने से लेकर पानी रखने तक में होता था। ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इन बर्तनों को उपहार के रूप में देने की परंपरा भी प्रचलित थी। आज कई घरों में ये बर्तन केवल पुराने सामान के रूप में रखे रह गए हैं।
पोषण में भी है धातुओं की भूमिका
पीतल मुख्य रूप से तांबे और जस्ते का मिश्रण है, जबकि कांसा मुख्यतः तांबे और टिन से बनता है। तांबा शरीर में ऊर्जा उत्पादन, आयरन के उपयोग और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, जस्ता रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है। हालांकि, इन बर्तनों में भोजन करने से शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं, यह निश्चित नहीं है। संतुलित आहार ही पोषण का प्रमुख आधार है।
सुरक्षित इस्तेमाल जरूरी
पारंपरिक बर्तनों का उपयोग करते समय उनकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है। पीतल के बिना कलई वाले बर्तनों में खट्टे खाद्य पदार्थ पकाने या लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए। कांसे के बर्तनों की संरचना और स्थिति के अनुसार उनका सुरक्षित उपयोग करना चाहिए।
आधुनिकता के दौर में पारंपरिक बर्तनों को पूरी तरह भुलाने के बजाय उनके सांस्कृतिक महत्व और सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। इससे पुरानी विरासत को सहेजने के साथ पारंपरिक खानपान की पहचान भी कायम रखी जा सकती है।
