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5 साल पहले जिसका कर दिया था अंतिम संस्कार, वो जिंदा लौटी घर! इसरावती नहीं तो फिर किसकी जली थी चिता?

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:35 PM (IST)

दिव्यांग इसरावती, जिसे परिवार ने पांच साल पहले मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था, अब जिंदा लौट आई है। ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. इसरावती पांच साल पहले घर से लापता हो गई थी।

  2. स्वजनों ने मृत मानकर एक अज्ञात शव का अंतिम संस्कार किया था।

  3. मुंबई के दिव्यांग आश्रम से संस्था उसे घर वापस लाई।

जागरण संवाददाता (नौतनवा) महराजगंज। जिस दिव्यांग महिला इसरावती को मरा मानकर स्वजन अंतिम संस्कार कर दिए थे, उसके पांच वर्ष बाद जिंदा लौटने का मामला अब चर्चा का विषय बना है। अब इसरावती के अचानक सामने आने से पूरा मामला उलझ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इसरावती जीवित थी तो पूर्व में जिस महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन थी?

सोनौली कोतवाली क्षेत्र के कैथवलिया उर्फ बरगदही गांव के मल्लाह टोला निवासी इसरावती मानसिक रूप से दिव्यांग है। स्वजन के अनुसार पांच वर्ष पहले वह घर से लापता हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला। इसी दौरान स्वजन को जानकारी मिली कि कोल्हुई थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिला है, जिसे पहचान के लिए महराजगंज के मर्चरी हाउस में रखा गया है।

स्वजन वहां पहुंचे और शव पर मिले कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान इसरावती के रूप में कर ली। इसके बाद शव का रोहिन नदी के त्रिमुहानी घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दिव्यांग आश्रम में थी इसरावती

इसरावती के भाई मुरारी के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले एक संस्था के लोग गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसरावती भटकते हुए मुंबई पहुंच गई थी। वहां उसे संस्था की ओर से दिव्यांग आश्रम में रखा गया था।

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उपचार और देखभाल के बाद वह धीरे-धीरे अपने गांव का नाम बताने लगी। इसके बाद संस्था के लोग उसे लेकर बरगदही पहुंचे और स्वजन के सिपुर्द कर दिया। पांच साल बाद इसरावती को सामने देखकर स्वजन भी हैरान रह गए।

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नौतनवा क्षेत्राधिकारी बसंत सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में अभी आया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जिस महिला का अंतिम संस्कार हुआ वह कौन थी? इसकी भी जांच होगी।