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नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद यूपी के महराजगंज में बजे सायरन, 2200 परिवारों पर मंडराया विस्थापन का खतरा

Published: Wed, 26 Aug 2026 07:30 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 26 Aug 2026 07:32 PM (GMT+05:30)

nepal flash flood नेपाल की त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने से महराजगंज की गंडक नदी में बाढ़ का खतरा मंडरा ...और पढ़ें

HighLights

  1. त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने से गंडक में बाढ़ का खतरा।

  2. सोहगीबरवा के 2200 परिवार विस्थापन के जोखिम में।

  3. प्रशासन ने सायरन बजाकर ग्रामीणों को किया अलर्ट।

जागरण संवाददाता, महराजगंज। नेपाल के त्रिशूली नदी क्षेत्र में अचानक बढ़े जलस्तर का असर गंडक नदी पर भी दिखने लगा है। बुधवार शाम चार बजे तक वाल्मीकिनगर बैराज से 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रात में पानी और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सोहगीबरवा क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

हालांकि फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन नदी किनारे के गांवों में सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट कर दिया है। निचलौल तहसील के टापू क्षेत्र में आने वाली तीन ग्राम पंचायतों के आठ राजस्व गांवों में बाढ़ पीएसी और एसडीआरएफ की टीमें भेजी गई हैं।

जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ की स्थिति बनी है। भोटेकोशी त्रिशूली नदी तंत्र का हिस्सा है, इसलिए नारायणी और कोसी नदी में पानी बढ़ने की संभावना है। प्रशासन वाल्मीकि बैराज और देवघाट पर लगातार निगरानी कर रहा है।

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फिलहाल बैराज का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन अगले आठ से 10 घंटे में खतरे के निशान से ऊपर जाने की आशंका को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी रखी गई हैं। सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहां ग्राम पंचायतों के आठ राजस्व गांवों में ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है।

पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को तत्काल ऊंचे स्थानों पर बनाए गए बाढ़ शरणालयों में पहुंचाया जाएगा। पशुपालन, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास और पंचायतीराज विभाग की टीमें भी सक्रिय हैं।

बाढ़ शरणालय, बाढ़ चौकियां और कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन बाल्मिकीनगर बैराज और देवघाट में नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है, नदी का जलस्तर जैसे ही बढ़ेगा वैसे ही सोहगीबरवा के लोगों को विस्थापित करने की कार्रवाई होगी।

छह गांवों के 2200 परिवारों पर नजर

सोहगीबरवा क्षेत्र के कटवासी, दवनहवा, भोथहा, कुंडहवा, मुंजा टोला और शिकारपुर में पानी पहुंचने की आशंका है। इन गांवों के करीब 2200 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है। जलस्तर बढ़ने पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है।

रोहुआ नाला पर लगाई नाव

बाढ़ की आशंका को देखते हुए रोहुआ नाला पर नाव लगा दी गई है। पानी बढ़ने पर इससे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने में मदद मिलेगी। नौरंगिया बिहार क्षेत्र करीब तीन किलोमीटर दूर है। रोहुआ नाला पार करने के बाद सोहगीबरवा क्षेत्र के गांवों का आवागमन प्रभावित हो सकता है। रात में पानी बढ़ने पर लोगों के साथ पशुओं को सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

तीन स्थानों पर बनाए गए बाढ़ शरणालय

सोहगीबरवा के बाबू टोला, बाजार टोला और मंदिर टोला के ऊंचे स्थानों पर शरण केंद्र बनाए गए हैं। हालांकि ग्रामीणों को पिछली बाढ़ की स्थिति अभी याद है। उस दौरान थाना परिसर के आसपास भी पानी भर गया था। इसलिए तेजी से जलस्तर बढ़ने की स्थिति में शरण केंद्रों की क्षमता और वहां तक पहुंच को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।

बाढ़ की स्थिति में परिवारों के सामने पशुओं को सुरक्षित रखने की भी चुनौती होगी। पशुपालक परिवार पशुओं को छोड़कर जाने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में परिवार का कोई सदस्य ऊंचे स्थान पर रुककर पशुओं की देखभाल करने को मजबूर हो सकता है। इससे परिवारों के बंटने और भोजन-पानी की व्यवस्था का संकट भी खड़ा हो सकता है।

बाढ़ पीएसी और एसडीआरएफ टीम के साथ पहुंचे राजस्व कर्मचारी

नारायणी नदी के पार टापू क्षेत्र में संभावित खतरे को देखते हुए सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहां ग्राम पंचायतों के आठ राजस्व गांवों में बाढ़ पीएसी और एसडीआरएफ की टीम के साथ राजस्व विभाग की टीम भी गांव में पहुंच गई है। बुधवार की शाम को प्रशासनिक टीम ने सोहगीबरवा में सायरन बजाकर ग्रामीणों को अलर्ट किया।

उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता ने बताया कि फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है और स्थिति सामान्य है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों को पहले से तैयार रहने के लिए कहा गया है। जलस्तर बढ़ने पर मानक के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा।

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