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महराजगंज में PM किसान निधि का बड़ा फर्जीवाड़ा: 23 हजार से अधिक संदिग्ध केस, 198 बच्चों के नाम पर भी उठ रही थी रकम

Published: Sun, 20 Sep 2026 03:35 PM (IST)

PM Kisan Fraud: महराजगंज में पीएम किसान योजना के तहत 23,955 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें 198 नाबालिग लाभार्थी ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. महराजगंज में पीएम किसान के 23,955 संदिग्ध मामले मिले।

  2. इनमें 198 नाबालिग लाभार्थी भी चिन्हित किए गए हैं।

  3. भुगतान रोककर 30 सितंबर तक सत्यापन का निर्देश।

सच्चिदानंद मिश्र, महराजगंज। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के डाटा की शासन स्तर पर हुई जांच में महराजगंज के 23,955 मामले संदिग्ध अथवा अपूर्ण पाए गए हैं, इतना ही नहीं इसमें 198 नाबालिग लाभार्थी भी चिन्हित हुए हैं। जांच में सामने आए इन मामलों की किस्त पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

अब शासन के निर्देश पर इन मामलों का सत्यापन कराने और डाटा को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जांच में सबसे अधिक मामले पिछले भू-स्वामी की पहचान का विवरण अधूरा होने के पाए गए हैं, यानि कि लाभार्थी के नाम पर भूमि तो है, लेकिन वह भूमि कैसे प्राप्त हुई इसका विवरण अधूरा है। इस श्रेणी में कुल 16,120 मामले दर्ज हैं।

इनमें 4,588 मामलों का सत्यापन हो चुका है, जबकि 15,782 मामले अभी लंबित हैं। पूर्व और वर्तमान दोनों भू-स्वामियों का विवरण वाली श्रेणी में कुल 4,867 मामले थे। इनमें 1,630 का सत्यापन हुआ और 4,741 मामले लंबित हैं। इसी तरह विरासत के अलावा अन्य कारण से भूमि नामांतरण वाले 3,460 मामलों में 354 का सत्यापन हो चुका है और 3,432 मामले लंबित हैं।

31 जुलाई से आठ सितंबर के बीच इस श्रेणी में 22 तथा पूर्व-वर्तमान भू-स्वामी वाली श्रेणी में 104 मामलों का सत्यापन भी हुआ। इसके अलावा नाबालिग होने के संदिग्ध विवरण के 198 और एक ही परिवार के सदस्य से संबंधित संदिग्ध विवरण के 267 मामले भी जांच में सामने आए हैं। शासन ने इन मामलों में भुगतान रोकने के बाद अब शत-प्रतिशत सत्यापन और डाटा शुद्धीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।

C-209-1-GKP1028-531799

सितंबर के अंत तक पीएम किसान संतृप्तीकरण के लिए माइक्रो प्लान तैयार कर फार्मर रजिस्ट्री अभियान से समन्वय करते हुए लंबित मामलों का सत्यापन पूरा करना होगा। उप कृषि निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि शासन स्तर पर जांच में चिह्नित मामलों का सत्यापन कराया जा रहा है। अभिलेख सही पाए जाने पर डाटा दुरुस्त किया जाएगा।

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किसानों के हित में सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर जोर है। सत्यापन में पात्र पाए जाने के बाद ही रुकी हुई किस्त के संबंध में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी, अन्यथा अपात्र पाए जाने पर पूर्व में प्राप्त धनराशि की रिकवरी के साथ ही कार्रवाई भी की जाएगी।

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