कौन हैं जहांगीर अली अंसारी? जो महराजगंज के मदरसे में 23 सालों से बच्चों को हिंदी में बना रहे निपुण
शिक्षक जहांगीर अली अंसारी 23 वर्षों से महराजगंज के एक मदरसे में बच्चों को हिंदी पढ़ा रहे हैं। उनका प्रयास ...और पढ़ें

मदरसा दारूल उलूम कुद्दूसिया अहले सुन्नत फखरुल उलूम परसौनी बाज़ार में बच्चों को हिंदी पढ़ाते शिक्षक जहांगीर अली अंसारी
HighLights
जहांगीर अली अंसारी 23 वर्षों से मदरसे में हिंदी शिक्षक।
बच्चों को शुद्ध हिंदी बोलने और समझने पर विशेष जोर।
मदरसे में हिंदी सीखने में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ी।
अजय कुमार शर्मा, महराजगंज। मदरसे की कक्षा में बच्चे जब हिंदी की किताब खोलते हैं तो उन्हें केवल पाठ पढ़ने की सीख नहीं मिलती, बल्कि शब्दों को सही ढंग से बोलने और वाक्यों का शुद्ध प्रयोग करने का अभ्यास भी कराया जाता है।
पिछले 23 वर्षों से हिंदी शिक्षक जहांगीर अली अंसारी इसी प्रयास में जुटे हैं। उनका मानना है कि भाषा का ज्ञान केवल परीक्षा में अंक हासिल करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चे हिंदी को समझें, सही लिखें और बोलचाल में भी शुद्ध शब्दों का प्रयोग करें, यही उनका प्रयास रहता है।
परसौनी बाजार स्थित मदरसा दारूल उलूम कुद्दूसिया अहले सुन्नत फखरुल उलूम में कक्षा एक से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई होती है। यहां हिंदी के साथ उर्दू, अरबी, फारसी, गणित, अंग्रेजी और विज्ञान की शिक्षा दी जाती है। अलग-अलग भाषाओं और विषयों के बीच हिंदी को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
विद्यार्थियों में भी बढ़ी हिंदी सीखने की रुचि
कक्षा में विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ाने के साथ उनके उच्चारण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। किसी शब्द को गलत बोलने पर उसे दोबारा बोलवाकर सही उच्चारण कराया जाता है। इसी तरह वाक्य बोलते समय शब्दों के उचित प्रयोग के लिए भी बच्चों को प्रेरित किया जाता है। जहांगीर अली अंसारी का कहना है कि हिंदी हमारी मूल भाषा है।
ऐसे में प्रत्येक विद्यार्थी को हिंदी का ज्ञान होना जरूरी है। वह बच्चों को समझाते हैं कि किसी भी भाषा में दक्षता केवल किताब पढ़ लेने से नहीं आती, बल्कि उसे समझने और व्यवहार में सही ढंग से प्रयोग करने से आती है।
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इसलिए कक्षा में पाठ पढ़ाने के साथ बच्चों को बोलने और अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। उनके इस प्रयास का असर बच्चों की कक्षा में भी दिखाई देता है। विद्यार्थी हिंदी के पाठ को रुचि के साथ पढ़ते हैं और नए शब्दों को समझने का प्रयास करते हैं।
हिंदी केवल पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि अपने विचारों को सहज और प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का माध्यम है। मेरा प्रयास रहता है कि बच्चे शब्दों का सही उच्चारण करें और शुद्ध हिंदी बोलने की आदत विकसित करें। भाषा का ज्ञान जितना समृद्ध होगा, बच्चों का आत्मविश्वास भी उतना ही बढ़ेगा।
जहांगीर अली अंसारी, हिंदी शिक्षक
