महराजगंज में 400 किसानों के 7.84 करोड़ रुपये अटके, गड़ौरा मिल में जांच शुरू
महराजगंज में गड़ौरा चीनी मिल द्वारा 400 किसानों के 7.84 करोड़ रुपये के गन्ना भुगतान को लेकर जांच शुरू हो ...और पढ़ें
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तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
400 किसानों के 7.84 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान अटके।
जिलाधिकारी के आदेश पर गड़ौरा मिल मामले की जांच शुरू।
किसानों के बयान और अभिलेख सहायक चीनी आयुक्त ने लिए।
जागरण संवाददाता, महराजगंज। गन्ना किसानों के 7.84 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के मामले में जांच आरंभ हो गई है। जिलाधिकारी के आदेश पर सहायक चीनी आयुक्त देवेंद्र प्रसाद मौर्य ने सोमवार को केन यूनियन कार्यालय में पीड़ित किसानों से मुलाकात की और उनके बयान दर्ज किए।
किसानों से गन्ना बिक्री से संबंधित पावतियों समेत अन्य अभिलेख भी लिए गए। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर सहायक चीनी आयुक्त अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे, जिसके बाद मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
लगभग छह वर्षों से भुगतान के लिए भटक रहे करीब 400 किसानों का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। सिसवां केन यूनियन के पूर्व उपाध्यक्ष जीतेंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में किसानों की शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में सहायक चीनी आयुक्त ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
बगहां के किसानों के नाम पर खरीद का आरोप
मामला पेराई सत्र 2020-21 का है। निचलौल और सिसवां बाजार क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि उस समय गन्ना विभाग ने बिहार के बगहां से गड़ौरा चीनी मिल को करीब 50 हजार क्विंटल गन्ना आवंटित किया था। नियमानुसार मिल को बगहां क्षेत्र के किसानों से गन्ना खरीदना था। लेकिन मिल प्रबंधन ने परिवहन खर्च बचाने के लिए सिसवां बाजार और निचलौल क्षेत्र के किसानों को गन्ना देने के लिए प्रेरित किया।
किसानों का कहना है कि उन्हें बताया गया कि मिल को गन्ने की आवश्यकता है और वे पर्ची का इंतजार न करें। आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति जमा कर सीधे मिल को गन्ना देने के लिए कहा गया। आरोप है कि इसके बाद करीब 400 किसानों से 7.84 करोड़ रुपये का गन्ना खरीद लिया गया।
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किसानों के अनुसार पावतियों में नाम, आधार संख्या और गन्ने की मात्रा सही दर्ज की गई, लेकिन पता महराजगंज के बजाय बगहां जिले के बलुआ क्षेत्र का दर्ज कर दिया गया। इसी वजह से भुगतान अटक गया और किसान लगभग छह वर्षों से अधिकारियों और मिल प्रबंधन के चक्कर लगा रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह ने बताया कि प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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