जागरण विमर्श: सोहगीबरवा में जंगल सफारी और होम-स्टे पर चर्चा, पर्यटन बढ़ने से बढ़ेगी लोगों की आय
दैनिक जागरण के 'जागरण विमर्श' में महराजगंज में पर्यटन को स्थानीय आर्थिकी और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया।

HighLights
सोहगीबरवा में जंगल सफारी और स्थानीय घरों में ठहरने की व्यवस्था।
नारायणी में डाल्फिन दर्शन, युवाओं को गाइड के रूप में तैयार करना।
बौद्ध स्थलों का विकास और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पर जोर।
महेंद्र कुमार त्रिपाठी, महराजगंज। पर्यटन का विस्तार तभी स्थानीय आर्थिकी बदल सकता है, जब पर्यटक आएं और उनकी जरूरतों से स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार मिले।
सोहगीबरवा में जंगल सफारी, नारायणी में डॉल्फिन दर्शन, स्थानीय घरों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था और युवाओं को गाइड के रूप में तैयार करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क और सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय सहभागिता बढ़ाने पर दैनिक जागरण के जागरण विमर्श के पहले सत्र ‘पर्यटन की संभावनाएं व चुनौतियां’ में विशेषज्ञों ने जोर दिया। सत्र संचालक डॉ. शांति शरण मिश्रा के बात की शुरुआत की जो स्थानीय रोजगार से आगे बढ़ी तो सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ निरंजन सुर्वे ने जंगल सफारी को इससे जोड़ दिया।
क्षेत्र में जंगल सफारी विकसित करने की योजना है और निजी क्षेत्र को भी इसमें जोड़ा जा रहा है। जिप्सी वाहन रखने वाले स्थानीय लोगों को सफारी से रोजगार मिल सकता है। पर्यटकों के ठहरने के लिए जंगल के आसपास पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने घरों में कमरे उपलब्ध कराएं तो उन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिल सकता है। इसी कड़ी में दरजनिया ताल को विकसित करने की योजना भी सामने आई।
सोहगीबरवा को पर्यटन माडल बनाने के लिए शासन स्तर पर पीपीपी माडल की योजना तैयार कर प्रस्ताव भेजा गया है। नारायणी की डॉल्फिन को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावना है। डॉल्फिन देखने आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय युवाओं को गाइड के रूप में तैयार किया जा सकता है।
पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की इस पहल के साथ पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ने विकास के लिए जरूरी सरकारी सहयोग का मुद्दा आगे बढ़ाया। जिले के पौराणिक और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रदेश सरकार प्रयास कर रही है। लेहड़ा देवी मंदिर के सुंदरीकरण के बाद यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। सोहगीबरवा, बनरसिहा कला और रामग्राम के विकास की संभावनाएं सरकार के समक्ष रखी जाएंगी।
बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी को पर्यटन की जरूरी शर्त बताते हुए उन्होंने सोहगीबरवा में राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना के लिए सरकार से बात करने की बात कही। बौद्ध पुरावशेषों के संरक्षण के लिए महराजगंज में संग्रहालय बनाने का प्रयास भी होगा। यह बात फिर जिले की बौद्ध विरासत तक पहुंची।
जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चयनिका श्रीवास्तव ने रामग्राम, भगवान बुद्ध की ननिहाल और उनसे जुड़े स्थलों की ऐतिहासिक कड़ियों को शोध और संरक्षण के जरिए सामने लाने की जरूरत बताई। बनरसिहा कला में 1992 से भगवान बुद्ध की ननिहाल से संबंधित उत्खनन चल रहा है, लेकिन अपेक्षित निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
रामग्राम को केंद्र में रखकर बौद्ध पर्यटन परिपथ विकसित करने के लिए स्पष्ट सरकारी नीति और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। नगर पालिका परिषद महराजगंज की अध्यक्ष डॉ. पुष्पलता मंगल ने इसी विरासत को पर्यटन की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए बौद्ध स्थलों के विकास की गति बढ़ाने की जरूरत बताई।
उत्खनन और शोध कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे तो देश-विदेश से पर्यटकों के आने की संभावना बढ़ेगी और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलेगा। विमर्श में सड़क और कनेक्टिविटी का सवाल भी इसी क्रम में उठा।
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