विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जागरण विमर्श में मिला किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मंत्र: समेकित खेती, पशुपालन और बागवानी पर दें विशेष जोर

By Sanjay KumarEdited By: Nishant Bharti
Published: Tue, 29 Sep 2026 08:40 AM (IST)

किसानों की आय बढ़ाने के लिए झारखंड में कृषि आधारित उद्योगों, नियमित प्रशिक्षण और उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर ...और पढ़ें

जागरण विमर्श में मिला किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मंत्र

जागरण विमर्श में मिला किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मंत्र

HighLights

  1. किसानों की आय बढ़ाने हेतु कृषि आधारित उद्योगों पर ध्यान दें।

  2. समेकित खेती, पशुपालन और बागवानी को बढ़ावा देना आवश्यक है।

  3. किसानों को नियमित प्रशिक्षण और बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाए।

जागरण संवाददाता, रांची। किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात तो सभी करते हैं, परंतु योजनाओं पर सही ढंग से अमल नहीं हो रहा है। किसानों की जरूरतें क्या है, इस पर उनसे संवाद ठीक से करने की जरूरत है। झारखंड में कृषि के क्षेत्र में काफी संभावनाएं है। 

दूसरे राज्यों के किसान यहां आकर 100-100 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। इसलिए जरूरत है किसानों की जरूरतें, उनके नियमित प्रशिक्षण और उत्पादों को बाजार मिले, इस पर ध्यान देने की। यदि यहां पर कृषि आधारित उद्योग लगाते हैं तो किसानों की आमदनी बहुत ही ज्यादा बढ़ा सकते हैं। 

किसानों की आमदनी कैसे बढ़े?

झारखंड से बांस, कटहल, सरगुजा, महुआ, मक्का आदि उत्पाद दूसरे राज्यों में ले जाए जा रहे हैं, परंतु यहां पर इसके संवर्द्धन के लिए कुछ नहीं हो पा रहा है। यह कहना है कृषि विज्ञान केंद्र गुमला बिशुनपुर के निदेशक रहे वरिष्ठ कृषि विज्ञानी डॉ. संजय पांडेय का। वे जागरण विमर्श के तहत सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय, रांची में अपनी बात रख रहे थे।

विषय था, किसानों की आमदनी कैसे बढ़े और सरकार को क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी नई तकनीक आने से जानकार किसान काफी लाभान्वित हो रहे हैं। नई तकनीक का लाभ सभी किसानों को मिले, इस पर सभी कृषि विज्ञान केंद्रों ओर कृषि विभाग के पदाधिकारियों को विचार करना होगा। वैसे किसानों को प्रशिक्षण के लिए बाहर भेजा जाए, जिनको सीखने में रुचि हो। 

किसानों को इजरायल भेजा गया 

उन्होंने कई उदाहरण दिए जब यहां के किसानों को इजरायल भेजा गया था और भारत लौटकर उसका लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को यह जानना होगा कि जहां पानी की उपलब्धता कम है वहां पारंपरिक फसल नहीं लगाकर जमीन की मांग के अनुसार फसल लगाएं। यहां सरगुजा, राई, तिल आदि की अच्छी खेती हो सकती है। इसमें कम पानी की जरूरत होती है। 

इसके साथ ही आलू, चुकंदर, मूंगफली, रहर दाल आदि का उत्पादन अच्छा होता है और मूल्य भी ठीक है। इसके साथ ही उन्होंने समेकित कृषि पर जोर दिया। खेती के साथ-साथ बकरी, गाय, सुअर आदि पालन को बढ़ावा देना होगा। बागवानी में भी काफी संभावनाएं हैं। 

यहां आम का अच्छा उत्पादन हो रहा है। इसके साथ ही दूसरे फलों पर भी ध्यान देना होगा। किसान और सरकार मिलकर सही ढंग से काम करें तो किसानों की आमदनी काफी बढ़ जाएगी।

यह भी पढ़ें- दुर्गा पूजा को लेकर झारखंड DGP तदाशा मिश्रा के कड़े निर्देश, बिना लाइसेंस वाले पंडालों का भी होगा सत्यापन