188 KM बहकर त्रिशूली में मिलती है बूढ़ी गंडकी, नेपाल में आई बाढ़ से यूपी के सटे जिलों को कितना खतरा?
नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में आई बाढ़ ने तबाही मचाई है, जिसका असर भारत में गंडक नदी तक पड़ने की आशंका है।

ग्लेशियर के ढहने से आई बाढ़। (फोटो- NDRRMA)
HighLights
नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में आई भीषण बाढ़।
भारत में गंडक नदी पर संभावित खतरे की आशंका।
महराजगंज में 14 घंटे का विशेष निगरानी अलर्ट जारी।
विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। बूढ़ी गंडकी नदी में रविवार तड़के आई बाढ़ ने नेपाल के गोरखा जिले में तबाही मचाई है। मनास्लू हिमाल (उत्तरी हिमालयी क्षेत्र) से निकलने वाली इस नदी का प्रवाह मार्ग प्रभावित है।
इसका असर भारत में गंडक नदी तक पड़ने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, नेपाल में सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बचाव कार्य में जुटीं हैं।
बूढ़ी गंडकी नेपाल की सप्तगंडकी प्रणाली की सात प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। यह नदी तिब्बत सीमा के पास स्थित 8,163 मीटर ऊंचे मनास्लू पर्वत के ग्लेशियरों से निकलती है। वहां से दक्षिण की ओर बहते हुए यह नेपाल के गोरखा और धादिंग जिलों के बीच से गुजरती है।
इसकी कुल लंबाई लगभग 188 किलोमीटर है। दोनों जिलों की सीमा पर स्थित बेनिघाट के पास त्रिशूली नदी में जाकर मिलती है। त्रिशूली और कालीगंडकी सहित अन्य सहायक नदियों से संगम के बाद यही प्रवाह आगे चलकर नारायणी नदी कहलाता है।

उत्तर प्रदेश व बिहार में गंडक के रूप में बहने के कारण बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ का सीधा असर यूपी के महराजगंज व कुशीनगर के साथ बिहार के बड़े भू भाग पर पड़ सकता है।
हराजगंज के जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि आशंका को देखते हुए 14 घंटे तक स्थिति पर विशेष निगरानी के लिए अलर्ट जारी किया है। राहत आयुक्त कार्यालय और नेपाल के संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
