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आदित्य चौरसिया हत्याकांड: बदनामी के डर से रची गई साजिश, तकनीकी साक्ष्यों ने खोल दिया राज

Published: Tue, 10 Feb 2026 02:39 PM (IST)

आदित्य चौरसिया हत्याकांड की गुत्थी तकनीकी और फील्ड जांच से सुलझी। प्रारंभिक साक्ष्य न मिलने पर डॉग स्क्वाड और मोबाइल ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. तकनीकी साक्ष्यों और डॉग स्क्वाड से सुलझी हत्या की गुत्थी।

  2. प्रेम प्रसंग की बदनामी छिपाने के लिए रची गई थी साजिश।

  3. मोबाइल लोकेशन और फोरेंसिक जांच ने अहम सुराग दिए।

जागरण संवाददाता, आनंदनगर। आदित्य चौरसिया हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को कई स्तर पर तकनीकी और फील्ड जांच का सहारा लेना पड़ा। प्रारंभिक जांच में घटना स्थल पर स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलने से मामला उलझा हुआ प्रतीत हो रहा था। पुलिस टीम हर पहलू पर सतर्कता से आगे बढ़ रही थी, ताकि कोई निर्दोष जांच की जद में न आए, लेकिन अंत में तकनीकी साक्ष्यों ने रहस्य से परदा उठाया तो पूरा मामला साफ हो गया।

छह फरवरी को शव मिलने के बाद डाग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया। प्रशिक्षित श्वान ने सूंघते हुए खेत से निकलकर सीधे लीलाछापर गांव की ओर रुख किया और संदिग्ध रूप से प्रेमिका के घर के आसपास पहुंचकर ठहर गया। इस संकेत ने जांच की दिशा बदल दी थी। हालांकि इसके पूर्व मृतक की बहन ने प्रेमिका से बातचीत का एक आडियो क्लिप भी पुलिस को सौंप दिया था, जिससे पुलिस को पहले से ही इस परिवार पर संदेह था।

डॉग स्क्वॉड के पहुंचने के बाद पुलिस ने घटनास्थल से लेकर संभावित मार्गों की बारीकी से पड़ताल की। सर्विलांस टीम ने मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल और अंतिम लोकेशन खंगाली। अंतिम लोकेशन लीलाछापर क्षेत्र में मिलने से शक और गहरा हुआ। बाद में युवक का मोबाइल शव मिलने के स्थान के पास बगीचे से बरामद किया गया।

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इससे घटनाक्रम की कड़ियां जुड़ती चली गईं, और यह ज्ञात हुआ कि मोबाइल को स्वीच आफ करके उसे फेंका गया है। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से लेकर संदिग्ध स्थान तक पैरों के निशान, आवाजाही के संकेत और समय-सीमा का मिलान किया। फोरेंसिक टीम ने भी आवश्यक साक्ष्य संकलित किए।

पूछताछ में मिले तथ्यों और तकनीकी प्रमाणों के आधार पर साजिश की परतें खुलती गईं, और इस प्रकार से प्रेम प्रसंग की बदनामी को छिपाने के लिए आरोपितों ने हत्या का कलंंक अपने सिर मढ़ लिया। फरेंदा थानाध्यक्ष योगेंद्र कुमार राय ने बताया कि मामले में वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए। संयमित और बहुस्तरीय जांच के बाद ही निष्कर्ष तक पहुंचा गया और इस समन्वित कार्रवाई से हत्या की गुत्थी सुलझाई जा सकी है।