योगी सरकार ने बदली यूपी की जर्जर जल संरचनाओं की तस्वीर, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण को मिली नई ताकत
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के लिए जर्जर जल संरचनाओं का कायाकल्प ...और पढ़ें

HighLights
योगी सरकार ने यूपी की जर्जर जल संरचनाओं का कायाकल्प किया।
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए प्रमुख बैराजों के गेट बदले।
60-70 फीट गहरे पानी में गेट बदलने की अभूतपूर्व तकनीक अपनाई।
डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सिंचाई तंत्र को अभेद्य बनाने और बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था को आधुनिक दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जल ही जीवन है' और 'बूंद-बूंद का बेहतर उपयोग' के संकल्प को साकार करते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जर्जर और दशकों पुरानी जल संरचनाओं का कायाकल्प कर दिया है। प्रदेश के प्रमुख बैराजों, बांधों, हेड रेगुलेटरों और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के जर्जर गेटों को न केवल बदला गया है, बल्कि 60 से 70 फीट गहरे पानी के भीतर गेट बदलकर राज्य ने एक अभूतपूर्व तकनीकी कीर्तिमान भी स्थापित किया है।
ओखला, गोमती और नरौरा बैराज का हुआ आधुनिकीकरण
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के अनुसार, लंबे समय से देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है।
गोमती और हिंडन बैराज: लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट और गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी 8 गेट सफलतापूर्वक बदले जा चुके हैं।
ओखला व नरौरा बैराज: दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले गए हैं, जबकि बुलंदशहर के नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले जा चुके हैं और 48 पर काम जारी है।
अन्य प्रमुख संरचनाएं: पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी 4 गेट, एटा के तातारपुर कनेक्टिंग व हेड रेगुलेटर के 20 गेट, और हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज के 8 खराब गेटों को विभाग की बीआईएस/आईएसओ प्रमाणित बरेली व झांसी कार्यशालाओं में निर्मित नए गेटों से बदला गया है।
70 फीट गहरे पानी के भीतर बदली गई तकनीक, दूर हुई रिसाव की समस्या
प्रदेश में पहली बार बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को बदलने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई।
गहरे पानी में ऑपरेशन: ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों को पानी के भीतर ही सफलतापूर्वक बदला गया।
चंद्रप्रभा बांध में रिसाव बंद: चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में 80 फीट गहराई पर स्थित गेटों से हो रहे रिसाव को गोताखोरों की मदद से स्थायी रूप से रोककर खरीफ और आगामी फसलों के लिए पानी सुरक्षित किया गया।
संभावित आपदाओं के लिए तैयार रखे गए 'स्पेयर गेट'
मुख्य अभियंता (यांत्रिक) उपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार केवल वर्तमान संरचनाओं को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावित आपदाओं और आकस्मिक खराबी से निपटने के लिए एडवांस तैयारी कर रही है।
ओखला बैराज, मौदहा (हमीरपुर), लहचूरा (महोबा), खो बैराज (बिजनौर), घाघरा बैराज (बहराइच) और शारदा बैराज (लखीमपुर खीरी) जैसी अति-संवेदनशील जल संरचनाओं के लिए विशेष स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए गेट बदला जा सकेगा और जन-धन की संभावित क्षति को रोकते हुए किसानों को निर्बाध सिंचाई का पानी मिलता रहेगा।
