लखनऊ [शोभित श्रीवास्तव]। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पौधारोपण के जरिये शहरों की खूबसूरती निखारने जा रही है। अब शहरों में सड़कों के किनारे चार-चांद लगाने वाले एक जैसे आकर्षक पौधे लगाए जाएंगे। यानी शहरों में अब 'एक सड़क एक प्रजाति' के आधार पर पौधारोपण होगा। फलदार पौधे शहरों के बाहर लगाए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में ऐसे पौधे लगेंगे जिनसे उन्हें जलाने की लकड़ी मिल सके। 

इस बार वन विभाग पौधारोपण अभियान में ऐसा प्रबंधन कर रहा है, ताकि शहरों की खूबसूरती और बढ़ सके। दिल्ली व चंडीगढ़ की तर्ज पर यूपी के प्रमुख शहरों को भी पौधारोपण के जरिये हरा-भरा बनाया जाएगा। शहरों में पौधारोपण के लिए जिन पौधों का चयन हुआ है उनमें गुलमोहर, अमलतास, जकरंडा, मौलश्री, कचनार, बोगनबेलिया, मिलिंगटोनिया आदि के साथ ही इको सिस्टम दुरुस्त रखने वाले पीपल, बरगद, पाकड़, अशोक, इमली, नीम, शीशम, अर्जुन आदि के पौधे लगाए जाएंगे। ऐसे पौधों का चयन किया गया है ताकि जब फूल आएं तो एक सड़क पर एक जैसे फूल दूर तक दिखाई दें।

फलदार पौधे शहरों के बाहर लगेंगे। इसके पीछे भी एक बड़ा कारण है। सार्वजनिक स्थानों पर जहां यह पौधे लगे होते हैं वहां फल आने पर इनमें बच्चे पत्थर मारकर अक्सर गिराने का प्रयास करते हैं। शहरों में इससे दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में इन पौधों को शहर के बाहर लगाने की योजना है। इनमें आम, अमरूद, आंवला, बेल, बेर, नींबू, कटहल, जामुन व महुआ प्रमुख हैं।

वहीं, ग्रामीण इलाकों में ऐसे पौधे लगेंगे जिससे किसानों की न सिर्फ आमदनी बढ़े बल्कि उन्हें चारा व जलाने की लकड़ी मिल सके। इसके लिए सुबबूल, सहजन, अगस्त, बबूल व खैर जैसे पौधे चिह्नित किए गए हैं। सुबबूल ऐसा पेड़ होता है जो बहुत कम पानी व देखरेख में तैयार हो जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर इसकी पत्तियां पशुओं के चारे के काम आती हैं। आमदनी बढ़ाने के लिए पापलर, यूकेलिप्टस, सागौन, शीशम, बबूल, कदम्ब, खैर आदि के पौधों का चयन किया गया है।

मंडल मुख्यालयों के शहर बनेंगे मॉडल

प्रदेश सरकार ने मंडल मुख्यालय वाले 18 शहरों को मॉडल बनाने का निर्णय लिया है। इनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, प्रयागराज, गोरखपुर, चित्रकूट, झांसी, गोण्डा, अयोध्या, बरेली, बस्ती, मीरजापुर, मुरादाबाद, मेरठ, वाराणसी व सहारनपुर शामिल हैं। इनमें पौधारोपण के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।

दिशा-निर्देश जारी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने बताया कि इस बार शहरों में एक सड़क पर एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। इससे न सिर्फ खूबसूरती बढ़ती है बल्कि पौधों का प्रबंधन भी अच्छे से हो जाता है। हमारी कोशिश है कि सड़कों की पहचान आगे चलकर अमलताश वाली रोड, कचनार वाली रोड या गुलमोहर वाली रोड जैसे नामों से हो। इसके लिए विभाग के अफसरों को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।

Posted By: Umesh Tiwari

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