लखनऊ [आशीष मिश्र] । योगी सरकार का दूसरा बजट भले अब तक का (चार लाख 28 हजार 384 करोड़ रूपये) सबसे बड़ा बजट भले ही रहा हो लेकिन वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल इस बार नई योजनाओं की घोषणा करने में कमी दिखी। नई योजनाओं की जगह योगी सरकार का पूरा ध्यान पुरानी योजनाओं को पूरा करने पर रहा है। इस बात की पूरी तस्दीक बजट में घोषित हुई 14,341.89 करोड़ की नई योजनाओं से लगाया जा सकता है। जबकि पिछली बार इस बार से लगभग चार गुना अधिक 55,781.96 करोड़ रुपये की नई योजनाएं घोषित की गई थी।

19 मार्च को 2017 को योगी सरकार के गठन के बाद पहली बार 11 जुलाई 2017 को वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने विधानसभा में अपना बजट पेश किया था। जिसमें 55781.96 करोड़ रुपये की नई योजनाएं घोषित की गई थी। जबकि इस बार वित्त मंत्री ने पिछले बार से लगभग चार गुना कम मात्र 14,341.89 करोड़ की नई योजनाएं घोषित की है।

हलांकि पिछले बजट में सरकार पर चुनाव के समय अपने लोक कल्याण घोषणा पत्र में घोषित योजनाओं को पूरा करने का दबाव था। इसके अलावा भारी भरकम रकम 36 हजार करोड़ की ऋण मुक्ति योजना, तथा सातवे वेतन आयोग को लागू करने के लिये 35 हजार करोड़ रूपये शामिल थे।

बताते चलें कि इसके पहले सपा सरकार ने 2016-17 के बजट में 13842 करोड़ रुपये तथा 2015-16 के बजट में 9388 करोड़ रुपये की नई योजनाओं की घोषणा की थी।

पिछले चार बजट में घोषित नई योजनाएं

14,341.89 करोड़ 2018-19

55,781.96 करोड़ 2017-18

13842 करोड़ 2016-17

9388 करोड़ 2015-16

 

Posted By: Ashish Mishra

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