UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। लंपी वायरस (Lumpy Skin Disease) के संक्रमण की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड की सीमाओं को मवेशियों के परिवहन के लिहाज से सील करने के साथ इन राज्यों के साथ मवेशियों के व्यापार पर रोक लगा दी है। पड़ोसी राज्यों की सीमा पर बसे झांसी, आगरा, अलीगढ़, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली और मेरठ मंडलों के 28 जिलों में लंपी वायरस का प्रभाव है। लंपी वायरस के संक्रमण को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राज्य के अन्य क्षेत्रों में पहुंचने से रोकने के लिए पशुओं के परिवहन पर लाकडाउन लगा दिया गया है।

पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने उत्तर प्रदेश में लंपी वायरस की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से किये जा रहे प्रयासों की जानकारी शुक्रवार को विधान सभा में दी। उन्होंने बताया कि लंपी चर्म रोग देश के 14 राज्यों में फैला है। उत्तर प्रदेश के पशुओं में इस रोग ने राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड की सीमा से प्रवेश किया है। यूपी में रोग की दस्तक होते ही अन्य प्रदेशों से लगी सीमाएं सील कर दी गई हैं।

प्रदेश में पशुओं के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पशुओं की हाट, बाजार, नुमाइश और उनकी खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। लंपी वायरस के संक्रमण को पश्चिमी उप्र से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पहुंचने से रोकने के लिए नेपाल से मध्यप्रदेश तक 320 किलोमीटर लंबी व 10 किलोमीटर चौड़ी रिंग बेल्ट बनाकर पशुओं का सघन टीकाकरण किया जा रहा है।

पशुओं के लिए आइसोलेशन सेंटर स्थापित

पशुधन मंत्री के अनुसार प्रभावित जिलों में 26,197 गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित हुए हैं जिनमें से 16,872 पशु (64 प्रतिशत) रोगमुक्त हुए हैं। प्रदेश में अब तक 26,04,500 पशुओं का गोटपाक्स टीकाकरण हो चुका है। 1126 टीमें टीकाकरण कार्य में लगी हैं। गो आश्रय प्रभावित स्थलों के पशुओं को अलग रखने के लिए आइसोलेशन सेंटर स्थापित किये गए हैं।

हर जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित

लंपी वायरस की निगरानी के लिए हर जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। लखनऊ में राज्य मुख्यालय पर भी एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। लखनऊ के कंट्रोल रूम का टोल फ्री नंबर -18001805141 व लैंडलाइन नंबर-0522-2741992 है, जिन पर सूचनाएं दी जा सकती हैं।

यह हैं लंपी रोग के लक्षण

पशुधन मंत्री ने बताया कि लंपी रोग के लक्षण पशुओं को बुखार आना, उनकी नाक व आंख से पानी बहना, भूख न लगना तथा शरीर पर सिक्के के बराबर चकत्ते/फफोले पड़ना है। इन फफोलों पर मच्छर-मक्खियां बैठती हैं जिनसे दूसरे पशु भी प्रभावित हो जाते हैं। यह रोग पशुओं से मनुष्यों में नहीं होता है। इसलियें लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

पशुपालकों को कर रहे जागरूक

पशुधन मंत्री ने कहा कि टीकाकरण और इलाज के अलावा पशुपालकों को गोष्ठियों के माध्यम से नीम की पत्तियों को जलाकर धुआं कर मच्छरों-मक्खियों को भगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पशुपालकों को नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर उस पानी में हल्दी के साथ लेप बनाकर पशु के शरीर पर लगाने का परामर्श दिया गया है जो कि बहुत प्रभावी है।

Edited By: Umesh Tiwari