लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वेबसाइट को विवादित इंटरव्यू देने के मामले में आइपीएस अफसर जसवीर सिंह को निलंबित कर दिया है। जसवीर सिंह एडीजी रूल्स एंड मैनुअल्स के पद पर तैनात हैं।

जसवीर सिंह पहले से भी विवादों में रहे हैं। इससे पहले वह जनहित याचिका दायर करने के कारण सुर्खियों में आए थे। अब आरोप है कि उन्होंने किसी अखबार को इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कुछ आपत्तिजनक बातें कही हैं। उन्हें 14 फरवरी को ही निलंबित कर दिया गया था। उन पर सेवा नियमावली का उल्लंघन करने का आरोप है। जसवीर सिंह मूलत : होशियारपुर (पंजाब) के रहने वाले हैं।

जसवीर सिंह ने 2002 में महराजगंज एसपी रहते गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ पर रासुका के तहत कार्रवाई की थी। योगी आदित्यनाथ पर रासुका लगाने के दूसरे दिन ही जसवीर सिंह का तबादला फूड सेल में हो गया था।

जसवीर सिंह को 30 जनवरी को हफिंगटन पोस्ट को दिए गए विवादित इंटरव्यू के चलते निलंबित किया गया है। एडीजी जसवीर सिंह को रूल्स मैनुअल के पद से सस्पेंड किया गया है। जसवीर सिंह 1992 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर बिना बताए छुट्टी पर भी जाने पर भी कार्रवाई की है।

हफिंगटन पोस्ट को इंटरव्यू में जसवीर सिंह ने कहा था कि मैं एक आईपीएस अफसर हूं। इस कारण अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकता। यूपी कैडर में तैनात जसवीर सिंह 1997 में तब सुर्खियों में आए, जब पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ नियुक्त हुए और कुंडा के विधायक राजा भैया पर शिकंजा कसा। इस घटना से जनता तो खुश हुई, लेकिन सियासी लोगों का दाना पानी बंद होने लगा।

उन्होंने कहा था कि यही कारण है कि कुछ दिनों के भीतर ही जसवीर सिंह को प्रतापगढ़ से हटा दिया गया। यहीं से जसवीर सिंह का भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और तेज हो गई। इससे पहले आईपीएस जसवीर सिंह के कहा कि देश सर्वोपरि है। राष्ट्र कार्य सर्वोपरि है। यहां पर किसी प्रकार का बलिदान देने के लिए अधिकारियों को तत्पर रहना चाहिए।  

Posted By: Dharmendra Pandey

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