मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

लखनऊ (जेएनएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मृदा परीक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। मृदा परीक्षण के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा करने वाले कृषि विभाग के नौ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें दो संयुक्त निदेशक, पांच उप निदेशक व दो सहायक निदेशक शामिल हैं। इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। इस सभी पर आरोप है कि इन लोगों ने चहेती फर्मों को टेंडर देने के लिए शर्तों में मनमानी की।

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' की आउटसोर्सिंग के लिए जारी टेंडर में बड़े स्तर की धांधली सामने आई है। जिससे पूरे कृषि विभाग में खलबली मच गई। इस प्रकरण में धांधली को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ की नाराजगी को देखते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस बड़ी धांधली में शामिल नौ आलाधिकारियों को निलम्बित कर दिया। इसके साथ टेंडर में शामिल सभी चारों कंपनियों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी किया गया है।

किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच के लिए मोदी सरकार ने गत 19 फरवरी 2015 को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ किया था। जिसमें किसानों को मिट्टी के प्रकार के आधार पर उनके खेतों के लिए सबसे उपयुक्त पोषक तत्वों के लिए अनुकूल सलाह दी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत हर जिले और अधिकांश तहसीलों में एक अभियान चलाकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बाटें जा रहे हैं। इसी बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड की आउटसोर्सिंग के लिए किए गए टेंडर में हुई धांधली की मिली शिकायत पर कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार की जांच में हुए खुलासे से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही समेत विभागीय आला अधिकारियों के होश उड़ गए।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विभाग के निलंबित आला अधिकारियों ने अपने स्तर से एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नामों से बनाई गई मेसर्स यस सोल्यूशन, मेसर्स सरस्वती सेल्स, मेसर्स सिद्धि विनायक, मेसर्स सतीश अग्रवाल नामक कंपनियों को वर्ष 2017-18 में उनके मुफीद शर्तें जोड़कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड का टेंडर दिया गया। यही नहीं, वर्ष 2018-19 में भी मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए केंद्र सरकार से जारी गाइड लाइन्स को दरकिनार कर इन्हीं कंपनियों को अपने स्तर से टेंडर जारी करके करीब 12 करोड़ की धांधली की गई। दिलचस्प यह है कि उपरोक्त जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया, उनके पास मृदा स्वास्थ्य के लिए आवश्यक मशीनें तक नहीं मौजूद नहीं है।

कृषि उत्पादन आयुक्त के निर्देश पर कृषि निदेशक की जांच में धांधली के खुलासे से जुड़ी रिपोर्ट बीते 28 सितंबर को ही दे दी गई थी, लेकिन कृषि मंत्री सुर्य प्रताप शाही ने इस मामले की जांच दोबारा प्रमुख सचिव कृषि से कराई, जिसमें भी हुए धांधली के खुलासे के बावजूद आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दस अक्टूबर को दोबारा कृषि उत्पादन आयुक्त के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। धांधली की खबर जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई।  तब मामले में सीएम की नाराजगी को देखते हुए कृषि मंत्री आनन-फानन में कल मामले में दोषी नौ अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इन फर्मों के खिलाफ एफआइआर के भी निर्देश दिये हैं। जिन कंपनियों को भुगतान हुआ है उनसे वसूली होगी। जिनका बकाया है उनका भुगतान जांच तक टाल दिया गया है।

करीब दो माह पहले इस मामले की जांच कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) डॉ. प्रभात कुमार ने की थी। यह फाइल 29 सितंबर से कृषि मंत्री के पास परीक्षण के लिए थी। कृषि मंत्री ने बताया कि जिन अधिकारियों का निलंबन हुआ है उन्होंने केंद्र के दिशा निर्देशों का उल्लंघन कर निविदा में कुछ ऐसी शर्तें जोड़ी जो कुछ फर्मों के ही हित में थी। मसलन 50 हजार से अधिक नमूनों की जांच एवं उत्तर प्रदेश में काम का अनुभव, डीएम से हैसियत प्रमाणपत्र आदि। इससे यहां पहले से काम कर रही मेसर्स यश साल्यूशन्स, सतीश अग्रवाल, सिद्धि विनायक और सरस्वती को ही मिट्टी की जांच का काम मिला। यह शर्तें नहीं होती तो निविदा की प्रक्रिया में कुछ और फर्में भी भाग ले सकती थीं। कृषि मंत्री ने बताया कि 2018-19 में मिट्टी जांच के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया में ऐसी शर्तें जोड़ दी गई, जिससे उससे पहले के वित्त वर्ष में काम पाने वाली फर्म यश साल्यूशंस को ही काम मिले। कृषि निदेशालय बीज एवं प्रक्षेत्र वीपी सिंह की अध्यक्षता में गठित कमिटी की जांच में यह बात सामने आई।

एपीसी की जांच रिपोर्ट में मेसर्स यश साल्यूशन्स और आस्ट्रे सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 में दी गई निविदाओं में भारी अनियमितताओं का जिक्र था। रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों ने प्राक्सी बिडर के रूप अन्य फर्मों को तैयार किया। गलत दस्तावेज बनाने में इनकी मदद की। इसी आधार पर बिना किसी योग्यता और अनुभव के इनको मिट्टी जांच का काम मिल गया। एपीसी ने इनके नमूनों की प्रामाणिकता पर भी संदेह जताया था।

निलंबित अधिकारी

पंकज त्रिपाठी-संयुक्त कृषि निदेशक शोध एवं मृदा सर्वेक्षण निदेशालय, विनोद कुमार-उप कृषि निदेशक बरेली, डॉ.अशोक कुमार उप कृषि निदेशक मुरादाबाद, जुगेंद्र सिंह राठौर संयुक्त कृषि निदेशक अलीगढ़, राजीव कुमार उप कृषि निदेशक सहारनपुर, रामप्रताप-उप कृषि निदेशक झांसी, सुरेश चंद्र चौधरी उप कृषि निदेशक मेरठ। (सभी अधिकारी 2017-18 और 2018-19 में जिन मंडलों में तैनात थे उनके निविदा समिति के अध्यक्ष थे)। इसके अलावा श्रीदेव शर्मा-उप कृषि निदेशक/ प्रभारी सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण/ कल्चर) अलीगढ़ और संजीव कुमार-सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण/ कल्चर) बरेली भी निलंबित किये गए हैं।

सभी संस्तुतियों पर नहीं हुई कार्रवाई

मिट्टी जांच घोटाले में नौ अधिकारियों के निलंबन और चार कंपनियों को काली सूची में डालने की कार्रवाई के बाद भी कुछ सवाल अनुत्तरित हैं। एपीसी ने जांच के बाद जो संस्तुतियां की थीं, कार्रवाई उसके अनुरूप नहीं हुई। कार्रवाई में हुई देरी भी खुद में सवाल खड़ा कर रही है। मसलन, एपीसी ने मेसर्स आस्ट्रे सिस्टम और डेलीकेसी कांटीनेंटल को भी काली सूची में डालने की संस्तुति की थी, पर ऐसा हुआ नहीं है। पत्रकारवार्ता में डेलीकेसी का तो जिक्र भी नहीं हुआ। अलबत्ता आस्टे्र सिस्टम की ई-निविदा को निरस्त करते हुए उससे वसूली और विस्तृत जांच का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के अनुसार एपीसी ने दोषी अधिकारियों के निलंबन के साथ उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज कराने की भी संस्तुति की थी लेकिन सिर्फ निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसी तरह एपीसी ने मेसर्स यश साल्यूशन और आस्ट्रे सिस्टम ने वर्ष 2017-18 और 2018-19 में जिन मंडलों में काम किये गए थे उनमें वसूली की संस्तुति की थी, पर कृषि मंत्री ने मात्र मुरादाबाद, बरेली और अलीगढ़ मंडल में वर्ष 2018-19 में किये गये भुगतान की वसूली के निर्देश दिये हैं।

70 फीसद छूट पर मिलेगा सोलरपंप

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार 10 हजार किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराएगी। दो से तीन हार्स पावर के पंपों में 70 और पांच हार्स पावर (एचपी)के पंपों पर 40 फीसद अनुदान देना होगा। 15 नवंबर से 10 दिसंबर तक जो किसान इसके लिए अपने जिले के उप निदेशक कृषि के यहां पंप की क्षमता के अनुसार देय राशि का ड्राफ्ट जमा करेंगे, उनको पहले आओ, पहले पाओ की नीति के तहत ये पंप दिये जाएंगे। दो एचपी के पंप के लिए 50820 या 51840 रुपये, तीन एचपी के पंप के लिए 80996 या 77700 रुपये और पांच एचपी के पंप के लिए किसानों को अपने अंशदान के रूप में 205200 रुपये का ड्राफ्ट देना होगा।

धान खरीद से किसानों को शिकायत नहीं

मंत्री शाही ने कहा कि न्यूनतम खरीद मूल्य की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और खरीद प्रक्रिया से बिचौलियों को खत्म करने के लिए विभागीय वेबसाइट पर किसानों के पंजीकरण की व्यवस्था है। अब तक इसपर करीब 1.5 करोड़ और खाद्य-रसद विभाग की वेबसाइट पर 13 लाख किसान पंजीकृत हो चुके हैं। इनसे खरीद के नाते ही पिछले सीजन में गेहूं और धान की रिकार्ड खरीद हुई। शिकायत पंजीकृत किसानों को नहीं बाकी लोगों को है। उन्होंने कहा कि रबी के मौजूदा सीजन में लिए भरपूर कृषि निवेश उपलब्ध हैं। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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