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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल 2.0 को लेकर चरम पर कयासबाजी, इन नामों की चर्चा ने पकड़ा जोर

By Dharmendra PandeyEdited By:
Published: Thu, 24 Mar 2022 02:46 PM (IST)Updated: Thu, 24 Mar 2022 02:49 PM (IST)

Yogi Adityanath Cabinet 2.0 योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल 2.0 में उप मुख्यमंत्री कद की संख्या को लेकर भी कयासबाजी चल रही ...और पढ़ें

Yogi Adityanath Cabinet 2.0: योगी आदित्यनाथ सरकार का 25 मार्च को शपथ ग्रहण समारोह
Yogi Adityanath Cabinet 2.0: योगी आदित्यनाथ सरकार का 25 मार्च को शपथ ग्रहण समारोह

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के राजनीति के इतिहास ने करवट ली और 37 वर्ष बाद किसी दल ने दोबारा सरकार बनाने लायक बहुमत प्राप्त किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचंड जीत दर्ज की है।

प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का 25 मार्च को शपथ ग्रहण समारोह है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 के मंत्रिमंडल को लेकर कयासबाजी चरम पर है। दो या तीन उप मुख्यमंत्रियों के साथ ही मंत्रिमंडल में किन विधायकों को जगह मिलेगी इस पर चर्चा ने जोर पकड़ा है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के साथ ही उत्तर प्रदेश की इकाई भी लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के मंथन में लगी है। चंद घंटों के बाद तस्वीर सभी के सामने होगी, लेकिन नए मंत्रियों के नाम के अनुमान को लेकर सट्टा बाजार भी सक्रिय हो गया है।

करीब चार दर्जन मंत्रियों को शपथ: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 273 सीट पर जीत दर्ज की है। इनमें 255 विधायक तो भाजपा के ही हैं। अपना दल (एस) के 12 तथा निषाद पार्टी के छह विधायक हैं। विधायकों के साथ ही विधान परिषद के सदस्यों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि अभी तो करीब चार दर्जन विधायक ही मंत्री पद की शपथ लेंगे। करीब चार दर्जन मंत्रियों (कैबिनेट, स्वतंत्र दर्जा प्राप्त और राज्यमंत्री) को शपथ दिलाई जा सकती है।

उप मुख्यमंत्री  की संख्या को लेकर भी कयासबाजी : योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल 2.0 में उप मुख्यमंत्री कद की संख्या को लेकर भी कयासबाजी चल रही है। कौशांबी के सिराथू से चुनाव हारने के बाद भी उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद को इस पद से हटाना मुश्किल है। वह पिछड़ों के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उनका ही प्रभाव रहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य के समाजवादी पार्टी में जाने के बाद भी पिछड़ा वर्ग का वोट भाजपा को मिला। ऐसे में केशव इसी पद पर दूसरी पारी शुरू कर सकते हैं। पुष्कर सिंह धामी के चुनाव हारने के बाद भी उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाए जाने से इस बात की संभावना और बढ़ गई है। अगर कोई गुजाइंश बनती भी है तो भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का नाम इस पद के लिए सामने लाया जा सकता है।  पिछड़ों के ही नेता के रूप में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का नाम पार्टी में है, लेकिन इस बार कुर्मी वोट भाजपा से छिटका है। स्वतंत्र देव कुर्मी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए इस वर्ग को करीब लाने और संगठन की मेहनत का इनाम उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाकर दिया जा सकता है। केशव प्रसाद मौर्य या फिर स्वतंत्र देव सिंह को उप मुख्यमंत्री पद मिल सकता है।

दूसरे उप मुख्यमंत्री : दूसरे उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा को भी हटाकर संगठन में लाया जा सकता है। इसके विपरीत ब्राह्मण नेता के रूप में उनकी उपयोगिता को देखते हुए उनको भी इस पद पर बरकरार रखा जा सकता है। अगर वह डिप्टी सीएम के पद से हटे तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। इसके साथ संभावना यह भी है कि यदि पार्टी आगरा ग्रामीण से विधायक बनीं उत्तराखंड की पूर्व राच्यपाल बेबी रानी मौर्य को डिप्टी सीएम बनाने की बजाए विधानसभा अध्यक्ष बना दे और दिनेश शर्मा उसी पद पर रहें तो प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी दलित नेता को दी जा सकती है।

युवा चेहरों के साथ महिलाओं : भाजपा का फोकस युवा चेहरों के साथ महिलाओं को भी मंत्रिमंडल में अधिक संख्या में शामिल करने का है। शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ भी चर्चा कर चुके हैं। महिलाओं में सरिता भदौरिया, डा. सुरभि, अदिति सिंह, अपर्णा बिष्ट यादव, केतकी सिंह तथा युवाओं में शलभमणि त्रिपाठी, नितिन अग्रवाल, पंकज सिंह, सुनील शर्मा, राजेश्वर सिंह, आशीष सिंह पटेल, जय वीर सिंह, दयाशंकर सिंह, मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, राकेश तिवारी, असीम राय के साथ कुंवर ब्रजेश भी हैं। सहयोगी दल निषाद पार्टी के डा. संजय निषाद के अलावा भाजपा के रामचंद्र यादव, राजेश त्रिपाठी तथा विजय बहादुर पाठक भी मंत्री पद की दौड़ में हैं।

पुराने व अनुभवी चेहरों को दोबारा जगह मिलना स्वाभाविक: मंत्रिमंडल में रहे पुराने व अनुभवी चेहरों के अलावा योगी आदित्यनाथ सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों को दोबारा जगह मिलना स्वाभाविक है। उल्लेखनीय है कि 60 मंत्रियों में से योगी आदित्यनाथ सहित पचास मंत्री चुनाव लड़े, जिनमें से 11 हार गए। तीन मंत्री सपा में जा चुके हैं, जबकि तीन का भाजपा ने टिकट काट दिया था। इस तरह सीधे-सीधे 17 सीटें खाली नजर आ रही हैं। यदि मंत्रिमंडल का यही आकार भी रखा गया तो विरोधी खेमे के दिग्गजों को हराने वाले कुछ नए विधायक और चुनाव में संगठन का पराक्रम दिखाने वाले पदाधिकारियों को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके साथ ही 15 पुराने मंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य, सुरेश कुमार खन्ना, ब्रजेश पाठक, सतीश महाना, सिद्धार्थ नाथ सिंह, सूर्य प्रताप शाही, श्रीकांत शर्मा, जय प्रताप सिंह, सिद्धार्थनाथ सिंह, आशुतोष टंडन 'गोपाल जी', भूपेन्द्र चौधरी, अनिल राजभर, आशुतोष टंडन, नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', कपिल देव अग्रवाल, जितिन प्रसाद, रविंद्र जायसवाल तथा चौधरी लक्ष्मीनारायण का तो मंत्री बनना लगभग तय है। अप्रत्याशित ढंग से भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आकर चुनाव जीतने वाले असीम अरुण और प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक रहे राजेश्वर सिंह के अलावा दयाशंकर सिंह और बलिया के बांसडीह की केतकी सिंह भी इस कतार में हैं।

भाजपा दलित वर्ग के नेता विधान परिषद सदस्य विद्याराम सोनकर और लक्ष्मण आचार्य को भी संगठन या सरकार में ला सकती है। इनके साथ ही कन्नौज विधायक असीम अरुण या फिर हाथरस विधायक अंजुला माहौर को भी दलित चेहरे के रूप में मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। बीते वर्ष योगी आदित्यनाथ सरकार मंत्रिमंडल के अंतिम विस्तार में राज्यमंत्री बनाए गए संजीव गोंड अनुसूचित जनजाति से हैं। इस बार इनका ओहदा बढ़ाया जा सकता है।

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