लखनऊ, जेएनएन। योग एक वैज्ञानिक पद्धति है, इससे मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ा सकते हैं। दमा जैसे रोग के उपचार में भी योग व प्राकृतिक चिकित्सा प्रभावी ढंग से असर डालती है। ये बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के पूर्व न्यायाधीश डीपी सिंह ने कहीं। वह शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा दमा का प्रबंधन विषय पर 15वें राष्ट्रीय सेमिनार में चर्चा कर रहे थे। 

मानव चेतना एवं योगिक विज्ञान संस्थान, लखनऊ विश्वविद्यालय एवं यूपी नेचुरोपैथी एंड योग टीचर्स एंड फिजीशियन एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में उन्होंने कहा कि मैंने 2014 में उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ की ओर से योग पर फैसला दिया था।

अध्यक्षता करते हुए लविवि के कुलपति शैलेश कुमार शुक्ला ने कहा कि कहा कि विश्वविद्यालय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के तरह-तरह के कार्यक्रमों को कराकर फिट इंडिया मूवमेंट को बल प्रदान किया जाए, जिससे देश व समाज का कल्याण हो। कॉलेज में योग प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें स्टूडेंट सहित दूसरे भी लाभ उठा सकेंगे। वहीं, विशिष्ट अतिथि व एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य अनिल कुमार सिंह ने कहा कि शरीर में ही सारी ऊर्जा है, ऊर्जा में ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन शरीर की हीलिंग करती है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमरजीत यादव ने कहा कि 15 से 20 मिनट आसनों का दैनिक अभ्यास अस्थमा रोग के प्रबंधन में बेहद मददगार है। नेचुरोपैथी चिकित्सा में हवा, मिट्टी, पानी, अग्नि व सूर्य की किरणों से इलाज किया जाता है। इस मौके पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। 

शंख बजाने से होती है आंतरिक अंगों की कसरत

आइएएस डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि शंख की ध्वनि और प्राणायाम शरीर के आंतरिक अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे आंतरिक हिस्सों की एक्सरसाइज होती है। वहीं, नेचुरोपैथ डॉ. शिखा गुप्ता ने के कहा कि हॉट फुट बाथ, चेस्ट व बैक हॉट टेक्निकल थेराप्यूटिक मसाज से दमा में फायदा मिलता है। वहीं, योगाचार्य दीपा श्रीवास्तव ने कहा कि डीप ब्रीदिंग भस्त्रिका प्राणायाम से दमा में आराम मिलता है।

 

Posted By: Anurag Gupta

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस