लखनऊ। समाजवादी परिवार ने इस महीने में दो बार कानून व्यवस्था के साथ निकाय क्षेत्र की एमएलसी सीटों के प्रत्याशियों के नामों पर मंथन किया और निर्णय मुखिया मुलायम सिंह यादव पर छोड़ दिया। मंत्रिमंडल में फेरबदल पर भी 'एक राय' नहीं हो पायी। अलबत्ता निकाय क्षेत्र के प्रत्याशी जल्द घोषित होने के संकेत हैं।

लोकसभा चुनावों में हार के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जून में एक राज्यमंत्री को बर्खास्त करते हुए आधा दर्जन मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया था मगर क्षेत्रीय व जातीय समीकरण दुरुस्त नहीं हो पाया था, लिहाजा कुछ दिन बाद ही नए सिरे मंत्रिमंडल में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हुई। समाजवादी परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मंत्री शिवपाल यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा की और खराब कामकाज वाले मंत्रियों के हटाने के संकेत भी दिए। कई बार मिले इन संकेतों का कोई नतीजा सामने नहीं आया।

कल फिर विक्रमादित्य मार्ग पर सपा मुखिया के आवास पर मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रो.राम गोपाल यादव के बीच बैठक हुई। थोड़ी ही देर चली इस बैठक में राज्यपाल के बयानों से सरकार की किरकिरी, कानून व्यवस्था की हालत, मंत्रिमंडल में फेरबदल, नामित कोटे की पांच एमएलसी सीटों के लिए राजभवन से नये सिरे से मांगे गए नामों पर चर्चा के अलावा जनवरी में रिक्त होने वाली निकाय कोटे की 36 सीटों के प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि जल्द से जल्द प्रत्याशी घोषित कर दिये जाएं। इस बैठक के तुरंत बाद मुलायम सिंह यादव दिल्ली रवाना हो गए और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री आवास चले गए। प्रो.राम गोपाल ने जरूर इतना कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से मंत्रिमंडल में नये चेहरे देखना चाहते हैं मगर फैसला लेने का अधिकार मुख्यमंत्री का है। वही इस पर कोई निर्णय लेंगे। ï

प्रो.राम गोपाल यादव ने यह भी कहा मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है, नहीं भी हो सकता है। कयासों को हवा देने वाले इसबयान से संकेत तो मिल ही रहा है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर समाजवादी परिवार 'एक राय' नहीं बना पायी है लेकिन अब मिशन-2017 की दिशा में कदम बढ़ाने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार व बदलाव होगा ही।

Posted By: Dharmendra Pandey

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