लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। 'यूपी नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा..।' ढाई साल से लगातार गूंज रहे सरकार के इस गुमान का वास्ता न ताज के संगमरमरी हुस्न से था, न लखनऊ के एतिहासिक इमामबाड़े से और न ही सूबे के किसी मुगल या ब्रिटिशकालीन स्मारक से। सरकार उत्तर प्रदेश में भारत की तस्वीर दिखाना चाहती थी।

सरकार की मंशा योजनाओं में ढली। इसके बाद तो अयोध्या में दीप जले, काशी में घंटा-घडिय़ाल तेज हुए और बरसाने से अबीर-गुलाल की सुगंध ऐसी उठी कि उत्सवों की उमंग में पर्यटक झूमने लगे और विदेशी धरती से भी तेज हो गई यूपी को देखने की रफ्तार।

उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास हर सरकार ने किया है। इससे पहले अखिलेश यादव सरकार ने तमाम स्मारकों के आसपास सुविधाओं का विकास किया तो वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार पर्यटन विकास के एजेंडे पर चली। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही पर्यटन विभाग की सूची में पर्यटन स्थलों की प्राथमिकता में कुछ तब्दीलियां हुईं। अन्य क्रियाकलापों से ज्यादा जोर धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने पर रहा।

लिहाजा, प्रदेश में जिन महत्वपूर्ण स्थलों पर श्रद्धालु ही पहुंचते थे, वहां के प्रति सैलानियों को आकर्षित करने के लिए पारंपरिक अवसरों को उत्सव का रूप दिया गया। मसलन, अयोध्या में भव्य दीपोत्सव, मथुरा में जन्माष्टमी पर कृष्णोत्सव, बरसाना में होली पर रंगोत्सव और बनारस में देव दीपावली और गंगा महोत्सव जैसे आयोजनों की शुरुआत योगी सरकार ने की। इससे एक माहौल बना और आस्था के यह केंद्र पर्यटन स्थल के स्वरूप में भी ढले। देश के साथ ही विदेशी सैलानियों की संख्या भी दो-ढाई साल में बढ़ी।

कैसे बढ़ी पर्यटकों की रफ्तार

अयोध्या (दीपोत्सव)

वर्ष     देशी            विदेशी    कुल

2016 15482456   20979   15503435

2017 17549633   23926   17573559

2018 19217571   27043    19244614

मथुरा (रंगोत्सव)

वर्ष       देशी            विदेशी     कुल

2016   6630000   25100    6655100

2017   7226700   26605   7253305

2018   7660300   27910   7688210

बरसाना (रंगोत्सव)

वर्ष         देशी             विदेशी     कुल

2016      3316000    1950       3317950

2017     3614440     2070       3616510

2018     3885400     2200       3887600

वाराणसी (देव दीपावली)

वर्ष         देशी             विदेशी       कुल

2016    5600146      312519   5912665

2017    5947355      334708   6282063

2018    6095890      348970   6444860

लखनऊ (लखनऊ महोत्सव)

वर्ष        देशी             विदेशी          कुल

2016    4870127      58716      4928843

2017    4999940      61253      5061193

2018    9887997      65618      9953615

मथुरा (कृष्णोत्सव-जन्माष्टमी)

वर्ष      देशी               विदेशी           कुल

2016  6630000          25100       6655100

2017  7226700          26605       7253305

2018  7660300          27910       7688210

ब्रांडिंग पर पूरा जोर

प्रदेश में पर्यटकों की आमद को आसमान पर प्रयागराज कुंभ ने पहुंचाया। योगी सरकार ने व्यवस्थाओं के साथ ही कुंभ की ब्रांडिंग पर पूरा जोर दिया। यही वजह है कि कुंभ स्नान को आने वालों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई। कह सकते हैं कि कुंभ में तो पर्यटन का सागर ही समा गया था। सरकार का दावा है कि 2013 के कुंभ में 7 करोड़ 86 लाख 65 हजार 500 श्रद्धालु आए थे, जबकि 2019 में 24 करोड़ 5 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इनमें विदेशियों की संख्या पहले साढ़े तीन लाख थी, जबकि इस वर्ष 10 लाख 30 हजार।

ताज महोत्सव में मामूली बढ़त

वर्ष       देशी                विदेशी           कुल

2016    8970126        1362791   10332917

2017    8654418        1614588   10269006

2018    8949879        1678559   10628435। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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