... इसलिए चक्रवाती तूफान Murasu का खतरा यूपी से टला, नहीं तो Arnab की तरह मच जाती भारी तबाही
चक्रवाती तूफान 'मुरासु' उत्तर प्रदेश तक क्यों नहीं पहुंचा, इसके कई वैज्ञानिक कारण हैं। नवंबर में उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं, चक्रवात ...और पढ़ें

चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Cyclone Murasu)
HighLights
नवंबर में उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं का प्रभाव।
चक्रवात 'मुरासु' का मार्ग दक्षिण आंध्र प्रदेश तट तक।
ज़मीनी घर्षण से कमजोर होकर उत्तर नहीं पहुंचा।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। नवंबर के महीने में उत्तर भारत और उत्तर प्रदेश पर उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं का प्रभाव बना रहता है। यह शुष्क और स्थिर वायुमंडलीय दबाव किसी भी दक्षिणी मौसमी तंत्र को उत्तर की ओर बढ़ने से रोकता है। इन्हीं कारणों से 'मुरासु' का असर केवल दक्षिण भारत तक ही सीमित रहा और उत्तर प्रदेश का मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा।
मौसम विभाग द्वारा साझी की गई जानकारी के आधार पर- चक्रवाती तूफान 'मुरासु' (Cyclone Murasu) के उत्तर प्रदेश तक न पहुँचने के मुख्य वैज्ञानिक और मौसमीय कारण नीचे बताए गए हैं।
चक्रवात 'मुरासु' का मार्ग बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर था, जिसका लैंडफॉल दक्षिण आंध्र प्रदेश तट पर हुआ। वायुमंडल की ऊपरी हवाओं का बहाव इसे उत्तर भारत या गंगा के मैदानी इलाकों की तरफ मोड़ने के बजाय दक्कन के पठार की ओर ले गया।
किसी भी चक्रवाती तूफान की मुख्य ताकत समुद्र से मिलने वाली गर्म और नम हवा होती है। 2–3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने के तुरंत बाद समुद्र से इसकी निरंतर नमी का संपर्क टूट गया। ज़मीनी घर्षण और पहाड़ों/पठारी इलाकों के अवरोध के कारण यह तटीय इलाकों में ही तेजी से कमजोर पड़कर 'डीप डिप्रेशन' और सामान्य कम दबाव क्षेत्र में बदल गया।
आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से उत्तर प्रदेश की सीमा की दूरी लगभग 1,000 किलोमीटर से अधिक है। आंतरिक भूभाग (तेलंगाना, महाराष्ट्र और दक्षिणी ओडिशा) पार करते-करते चक्रवात का दायरा और बादलों का घनत्व पूरी तरह बिखर गया, जिससे इसका असर आगे उत्तर की ओर नहीं बढ़ सका।