लखनऊ, जेएनएन। पूरे विश्व में रोज 7177 मृत शिशु का जंम होता है जिसमें अकेले भारत में 1622 मृत शिशु का जन्म होता है जो विश्व में सबसे अधिक है। गर्भ में शिशु का मृत्यु रोकने के लिए गर्भधारण से लेकर जन्म लेने कर हर कदम पर भ्रूण की निगरानी करनी होगी। विश्व फीटस डे पर आयोजित वेबीनार में संजय गांधी पीजीआइ के मैटर्नल एंड रिप्रोडेक्टिव विभाग की प्रमुख एवं फडरनेशन आफ आब्सेट्रेक्टिव एंड गायनकोलाजी के जेनटिक्स एंड फीटल मेडिसिन की चेयरपर्सन प्रो. मंदाकनी प्रधान ने कहा सुरक्षित शिशु के जंम के लिए पांच स्टेप पर निगरानी जरूरी है। 

हर स्टेप पर भ्रूण की देख –रेख के लिए संसाधन के साथ ही लोगों में जागरूकता की जरूरत है। प्रो.नीता सिंह कहती है कि शिशु डाउन सिंड्रोम, रीढ़ ही हड्डी में विकृति सहित अन्य किसी बीमारी के साथ शिशु पैदा होता है तो वह परिवार के लिए बडी चुनौती खडी करता है। शिशु का जीवन तो तबाह होता ही है साथ की मां 

पिता के लिए हर समय ध्यान देना होता है। इसी तरह हाई रिस्क प्रिगनेंसी है तो भी गर्भ धारण के बाद तमाम तरह की परेशानी आती है। इन सब से बचने के लिए जरूरी है भ्रूण की सुरक्षा के पांचों स्टेप का पालन किया जाए। इस मौके पर फाग्सी के अध्यक्ष डा. अल्पेश , सचिव डा. जयदीप के अलावा डा. मानसी सहित अन्य लोगों ने जानकारी दी। वेबीनार में देश भर के स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

क्या पांच स्टेप

  • प्लान मी- गर्भधारण करने से पहले डाक्टरी सलाह
  • स्क्रीन अर्ली- गर्भधारण करने के पहले तीन महीने जांच
  • डायग्नोस टाइमली- भ्रूण में बीमारी या खराबी का पता लगना
  • ट्रीट मी- गर्भस्थ शिशु में इलाज ( फीटल थेरेपी)
  •  होल्ड मी- सुरक्षित प्रसव

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