लखनऊ, जेएनएन।  सिनेमा के डिजिटल युग के साथ शहर और इंडस्ट्री से जुड़े कई रोचक किस्से साझा किए गए जब शनिवार को अभिनेत्री दिव्या दत्ता, अर्जन बाजवा, अनुराग अरोड़ा, तरुण जैन, मानसी जैन, तारिक नावेद सिद्दीकी और अनुपमा चोपड़ा एक कार्यक्रम में शामिल होने राजधानी पहुंचे। दिव्या दत्ता ने कहा कि बड़े पर्दे और डॉल्बी साउंड सिस्टम सिनेमा के दर्शकों की पहली पसंद है, इसका क्रेज हमेशा रहेगा। एक ही मंच पर मौजूद बॉलीवुड के सितारों के शहर और इंडस्ट्री से जुड़े अनुभव।

बस इतना ही फर्क है..

डिजिटल दौर में शॉर्ट फिल्मों व वेब सीरीज पर अभिनेत्री दिव्या दत्ता कहती हैं, मेरी पहली शॉर्ट फिल्म ‘प्लस-माइनस’ थी। कलाकारों को उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है, जितनी कि बड़े पर्दे के लिए। शूटिंग में वक्त कम लगता है और देखने के लिए अपनी ऑडियंस को लिंक शेयर करना पड़ता है। चलते-फिरते, कभी भी, कहीं भी इनको देख सकते हैं, बस इतना ही फर्क है।

घर जैसा लगता है लखनऊ

 दिव्या कहती हैं, इस शहर में आकर बहुत अपनापन-सा लगता है। यहां के लोग, यहां का खाना, हर एक चीज अच्छी लगती है। दो-तीन महीने पहले भी एक बुक लॉन्च पर यहां आई थी। लखनऊ बिल्कुल घर जैसा लगता है।

मलाला की मां का रोल किया: दिव्या ने बताया कि हाल ही में लंदन से मलाला की बायोपिक पर बन रही ‘गुल मकाई’ फिल्म के प्रीमियर से लौटी हूं। इसमें मैंने मलाला की मां का रोल किया है। इसके अलावा बच्चों की फिल्म ‘झलकी’, सर्कस पर आधारित ‘रामसिंह चार्ली’ फिल्म और अरशद वारसी व जूही चावला के साथ एक फिल्म आ रही है जिसका टाइटल तय नहीं है।

..तो पूरा हुआ सपना

फिल्म दंगल में आमिर खान के भाई का किरदार निभाने वाले अनुराग अरोड़ा कहते हैं, आमिर खान के साथ काम करना हर कलाकार का सपना होता है, मेरा भी था। दंगल में पूरा हुआ। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। अभिनय से पहले मेरा पूरा बचपन किताबों के बीच गुजरा है। पिता की किताबों की दुकान थी वहीं बैठता था। वहां कॉमिक्स, किताबें पढ़ता था। अभिनय के अलावा निर्देशन में भी काम करना है।

 थ्रिलर्स फिल्मों पर कर रही हूं काम

 पहली शॉर्ट फिल्म छुरी की स्क्रिप्ट लिखने वाली राइटर व डायरेक्टर, मानसी जैन कहती हैं, एवरीथिंग इज ऑलराइट मेरी दूसरी शॉर्ट फिल्म है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पांच साल का कोर्स करने के बाद फिल्मों का रुख किया। फिलहाल, थ्रिलर्स पर काम कर रही हूं। मोह माया मनी 2013 में लिखी थी।

साल में दो बार लखनऊ जरूर आता हूं

राइटर व डायरेक्टर तारिक नावेद सिद्दीकी कहते हैं, मैंने पहली बार किसी शॉर्ट फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है। सुधीर मिश्र के साथ कई फिल्मों पर काम कर चुका हूं। लखनऊ से मेरा पुराना नाता रहा है। पिताजी रेलवे में थे इसलिए लखनऊ के कई इलाकों में रहा हूं। कैथेड्रल, सेंट फ्रांसिस और लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है। 2001 में मुंबई का रुख किया तब से वहीं हूं पर साल में दो बार यहां जरूर आता हूं।


तेलुगु फिल्म करना थी चुनौती

फिल्म फैशन से लोकप्रिय हुए अभिनेता अर्जन बाजवा कहते हैं, तेलुगु फिल्म में काम करना सबसे बड़ा चैलेंज था। दिल्ली में एक पंजाबी परिवार से हूं। साउथ की भाषा बोलना मुश्किल काम था। मैं स्क्रिप्ट को रट लेता था लेकिन उस इंडस्ट्री से बहुत कुछ सीखा है। आर्किटेक्चर की पढ़ाई के साथ थियेटर से भी जुड़ा रहा। उसके बाद फिल्मों का रुख किया। फिल्मों में ही काम करना पसंद करूंगा, टीवी पर काम करने का अभी सोचा नहीं है।

Posted By: Anurag Gupta

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