लखनऊ, जागरण संवाददाता। बारिश न थमने से ईंट कारोबारियों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही है। शहर के करीब 150 भट्ठों पर पकाई के लिए पाथी गईं कच्ची करीब डेढ़ करोड़ ईंट फिर से खराब हो गई है। भट्ठा व्यापारियों का कहना है कि 15 जनवरी से शुरू होने वाले भट्ठों में अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। 15 फरवरी के बाद से ईंट का भाव साढ़े आठ हजार रुपया प्रति हजार होने के आसार हैं।

ईंट का सीजन 15 जनवरी के बाद भट्ठों की फुंकाई के साथ शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार मौसम खराब होने से भट्ठे शुरू नहीं हो सके। तैयार की गई बड़ी संख्या में कच्ची ईंट बर्बाद हो गई। इधर फिर से बारिश होने से दोबारा पाथी गईं ईंटे फिर से खराब हो गई हैं। कारोबारी कहते हैं कि अगर औसत एक लाख ईंट भी प्रति भट्ठा रखी जाए तो करीब डेढ़ करोड़ ईंट फिर से खराब हो गई हैं। इसका असर नई ईंटों के भाव पर पड़ना तय है। सात हजार रुपये प्रति हजार मिलने वाली ईंट आठ और अब साढे़ आठ हजार रुपये तक बिकने के आसार हैं। साथ ही जनवरी माह से बाहर आने वाली नई ईंटें अब फरवरी महीने के अंत तक बाजार में आ पाएंगी। ईंटों की कमी होगी। इससे न केवल भवन निर्माण महंगा होगा बल्कि कीमतें भी तेजी से ऊपर चढ़ेंगी। भट्ठा कारोबारियों की मानें तो करीब तीस फीसद से अधिक ईंट का उत्पादन इस बार कम रहेगा।

ईंटों की पकाई का काम 15 से शुरू हो जाता है। बाजार में नई ईंट जनवरी माह के अंत तक आ जाती है। लेकिन इस बार लगातार हो रही बरसात से भारी संख्या में कच्ची ईंट खराब हुई हैं। करीब डेढ़ करोड़ ईंट और बदसूरत हो गई हैं। पहले तीन करोड़ ईंट से अधिक के हुए नुकसान की भरपाई अभी हो नहीं पाई थी कि दोबारा बारिश ने कच्ची ईंटों को खराब कर दिया है। अव्वल ईंट का भाव अगले माह में साढ़े आठ हजार से अधिक होना तय है।

मुकेश मोदी, महामंत्री ब्रिक किल्न एसोसिएशन

कोयला और डीजल का भाव हुआ दोगुना : भट्ठा व्यापारियों के मुताबिक काेयला और डीजल पहले से ही महंगा चल रहा है। काेयला और डीजल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसे में बेमौसम की यह इस बरसात से कारोबार तबाह हो गया है। प्रत्येक भट्ठे पर लाखों कच्ची ईंट बर्बाद हुई हैं।

फरवरी के अंत में होंगे प्रति हजार ईंट का यह भाव

  • अव्वल -8,500
  • नंबर दो -7,500
  • पीली ईंट- 5,000

Edited By: Anurag Gupta