जब यूपी पुलिस पर लगा दाग और दहल उठा थी राजधानी, पढ़ें विवेक तिवारी हत्याकांड की Inside Story
लखनऊ के गोमतीनगर में 2018 में एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी की पुलिस फायरिंग में हुई मौत के मामले में अदालत ...और पढ़ें

विवेक तिवारी हत्याकांड।
HighLights
2018 में एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी की पुलिस फायरिंग में मौत।
सिपाही प्रशांत चौधरी पर हत्या का आरोप, राष्ट्रीय बहस छिड़ी।
हत्याकांड में मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया
जागरण संवाददाता, लखनऊ। 28 सितंबर 2018 की रात… गोमतीनगर की सड़क पर सब कुछ सामान्य था। एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान को घर छोड़ने जा रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में एक मामूली पुलिस जांच का सामना राजधानी के सबसे चर्चित हत्याकांड में बदल जाएगा और इसकी गूंज लखनऊ से निकलकर पूरे देश तक पहुंचेगी। आठ साल बाद 17 सितंबर 2026 को अदालत इसी मामले में फैसला सुनाया, जिसमें आरोपी सिपाही दोषी पाया गया है।
रात करीब 1:30 बजे गोमतीनगर विस्तार में सिटी मांटेसरी स्कूल के पास बाइक सवार सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने विवेक की एसयूवी को रोकने का प्रयास किया। यहीं से दोनों पक्षों के बयानों में अंतर सामने आया।
पुलिसकर्मी प्रशांत का कहना था कि विवेक ने वाहन रोकने के बजाय बाइक को टक्कर मारने की कोशिश की। उसने खुद को बचाने के लिए गोली चलाने का दावा किया। दूसरी ओर कार में मौजूद सना ने बताया कि पुलिसकर्मी आक्रामक तरीके से वाहन रुकवा रहे थे और एक सिपाही ने कार की खिड़की के भीतर लाठी डालने का प्रयास किया।

करीब 15 मिनट बाद पुलिस की गाड़ी मौके पर पहुंची और विवेक को अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद मामला और उलझता चला गया। आरोपित सिपाही ने थाने पहुंचकर विवेक के खिलाफ ही हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग कर दी और दावा किया कि कार से उसे कुचलने की कोशिश हुई थी।
दूसरी तरफ सना का बयान घटना की अलग तस्वीर पेश कर रहा था। शुरुआती पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। विवेक की पत्नी कल्पना की ओर से दर्ज कराई गई दूसरी प्राथमिकी में सना के साथ पुलिस के व्यवहार और दबाव के आरोप लगाए गए। घटना ने देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी। मुख्यमंत्री ने मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। दोनों सिपाही गिरफ्तार हुए और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिए गए। एसआइटी गठित हुई।
घटनास्थल पर सना के बयान के आधार पर क्राइम सीन दोबारा बनाया गया। बाद में आरोपित पुलिसकर्मियों से भी घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया गया, ताकि दोनों पक्षों के दावों का मिलान किया जा सके। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने आत्मरक्षा की कहानी को स्वीकार नहीं किया।
19 दिसंबर 2018 को दाखिल आरोपपत्र में प्रशांत चौधरी पर हत्या की धारा में आरोप लगाया गया। पुलिस की जांच में कहा गया कि उस समय उसके सामने तत्काल जीवन का खतरा नहीं था।
संदीप कुमार के खिलाफ भी अलग आरोप लगाया गया। उस रात सिर्फ विवेक की जिंदगी नहीं थमी थी। उनके पीछे पत्नी कल्पना और बेटियां रह गईं। दूसरी ओर घटना ने लखनऊ पुलिस की छवि को लेकर देशभर में सवाल खड़े कर दिए। पुलिस की कार्रवाई, चश्मदीद का बयान, आरोपितों का पक्ष और जांच हर पड़ाव इस मामले को सुर्खियों में बनाए रहा।
यह भी पढ़ें- विवेक तिवारी हत्याकांड: अदालत ने मुख्य आरोपी को ही माना दोषी, साक्ष्य के अभाव में संदीप बरी
अब 17 सितंबर 2026 को, यानी घटना के करीब आठ वर्ष बाद, लखनऊ की अदालत ने विवेक तिवारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया है, जबकि दूसरे आरोपी संदीप को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
