‘मां परेशान मत हो… मैं पैसे जमा करूंगी, हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे; विवेक तिवारी की बेटी ने मां को दी हिम्मत
विवेक तिवारी की बेटी शिवी ने मां कल्पना को हिम्मत देते हुए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगी और पिता के हत्यारों को कड़ी सजा दिलाएंगी।

HighLights
शिवी ने मां कल्पना को हिम्मत दी, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने का संकल्प।
परिवार अदालत के फैसले से असंतुष्ट, उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी।
कल्पना ने मुख्यमंत्री योगी से मामले में हस्तक्षेप की अपील की।
अवनीश मिश्र, लखनऊ। आठ साल पहले बड़ी बेटी शिवी ने पिता विवेक तिवारी को खोया तब सातवीं कक्षा में थी। पढ़ाई के साथ-साथ पुलिस के बाद अदालत की कार्यवाही के जरिए मां कल्पना तिवारी को इंसाफ के लिए लड़ता देखते-देखते अब वह 20 वर्ष की हो चुकी है।
सोमवार को फैसले को लेकर जितनी बेचैनी मां समेत सभी परिवारजन को थी उतनी ही शिवी को भी। अदालती निर्णय की जानकारी उसे मां के आंसुओं से मिली। रिश्तेदारों को कल्पना को सांत्वना और हिम्मत देता देख शिवी से भी रहा नहीं गया।
उन्हें टूटता देख शिवी ने कहा- मां आप परेशान मत हो... मैं करियर बनाकर पैसे जमा करूंगी और पापा के हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ूंगी। पापा को मारने वाला खुलेआम नहीं घूम पाएगा। अब तक आपने हमको संभाला, अब हम परिवार को संभालेंगे।
अदालत के फैसले से असंतुष्ट परिवार
विवेक तिवारी का पूरा परिवार अदालत के फैसले से असंतुष्ट है। कल्पना पूरी तरह से टूट गई हैं, लेकिन शिवी के इन शब्दों ने जैसे विश्वास दिलाया कि उम्मीदें अभी शेष हैं। कुछ ही क्षण बाद कल्पना बोल पड़ीं- पति को मारने वाले को फांसी या उम्रकैद की सजा दिलाने के लिए हर संभव लड़ाई लड़ूंगी।
कल्पना के भाई विष्णु शुक्ला ने बताया कि घटना के बाद से अब तक प्रदेश सरकार ने परिवार की मदद की है। उस समय हम लोग सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सीबीआई जांच रहने दो। एसआईटी निष्पक्ष जांच करेगी। आप लोगों को न्याय मिलेगा।
हम लोग सत्र न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। दीदी (कल्पना तिवारी) कह रही हैं कि सीएम योगी को मामले का संज्ञान लेना चाहिए। प्रदेश सरकार की ओर से हाई कोर्ट में अपील करनी चाहिए। जरूरत पड़ी तो हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर ऐसा करने की मांग करेंगे।
ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद लेंगे कानूनी सलाह
विष्णु शुक्ला ने बताया कि न्यायालय ने प्रशांत को हत्या का दोषी न मानकर गैरइरादतन हत्या का दोषी माना है। तब से हम लोग परेशान हैं। अपने परिचित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, वकीलों और पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। सभी ने कहा कि ऑर्डर की कॉपी आने पर उसकी बिंदुवार अध्ययन किया जाएगा।
उससे पता चला कि केस हत्या का क्यों नहीं माना गया? कहां पर साक्ष्य की कमी आई? विवेचना में कोई खेल हुआ या नहीं? हुआ तो कैसे हुआ? इन सभी तथ्यों को जुटाकर फिर मजबूती से हाई कोर्ट में अपील की जाएगी।
