विवेक तिवारी हत्याकांड में आज तय होगी दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी की सजा, अदालत सुनाएगी फैसला
विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी की सजा आज तय होगी। सत्र न्यायालय ने प्रशांत को गैर इरादतन हत्या (धारा 304) का दोषी माना है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी की सजा आज तय होगी।
अदालत ने गैर इरादतन हत्या धारा 304 में दोषी माना।
विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी फैसले से असंतुष्ट, करेंगी अपील।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए बर्खास्त सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी की सजा सोमवार को तय होगी।
आठ साल तक चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने गुरुवार को प्रशांत को आईपीसी की धारा 302 के बजाय गैर इरादतन हत्या की धारा 304 के तहत दोषी माना था। अदालत ने सजा सुनाने के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है। इसके लिए जेल में बंद प्रशांत को सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
वहीं, मामले में दूसरे आरोपित सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। फैसला आने के बाद विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके भाई विष्णु ने असंतोष जताया था। कल्पना ने कहा था कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और न्याय के लिए हाई कोर्ट जाएंगी।
अदालत ने प्रशांत को धारा 304 में दोषी ठहराया है। हालांकि सजा की अवधि कितनी होगी, यह सोमवार को सुनाए जाने वाले आदेश में स्पष्ट होगा। अदालत ने सजा सुनाने के दिन प्रशांत को जेल से तलब करने का आदेश दिया है। दोषसिद्धि के बाद प्रशांत और बरी हुए संदीप दोनों अदालत में रो पड़े थे।
गोमतीनगर में 29 सितंबर 2018 की रात विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से लौट रहे थे। गोमतीनगर विस्तार में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने कार रोकने का प्रयास किया था। आरोप के मुताबिक, कार नहीं रुकने पर प्रशांत ने गोली चला दी थी, जो विवेक को लगी। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने पर उनकी मौत हो गई थी।
आठ गवाहों की हुई गवाही
मामले में 22 मार्च 2019 को प्रशांत के खिलाफ आइपीसी की धारा 302 और 323 में आरोप तय हुए थे। संदीप पर धारा 302 के सहपठित धारा 114 और 323 के आरोप लगाए गए थे।
अभियोजन ने आठ गवाहों का परीक्षण कराया, जबकि बचाव पक्ष ने फोरेंसिक विशेषज्ञों समेत आठ सफाई साक्ष्य प्रस्तुत किए। 26 नवंबर 2024 को दोनों आरोपितों के सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किए गए थे। करीब आठ वर्ष चले विचारण के बाद अदालत ने प्रशांत को धारा 304 में दोषी ठहराया।
