विवेक तिवारी हत्याकांड: बर्खास्त कांस्टेबल प्रशांत चौधरी गैर इरादतन हत्या का दोषी, संदीप कुमार बरी
विवेक तिवारी हत्याकांड में बर्खास्त कांस्टेबल प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया है, जबकि सह-अभियुक्त संदीप ...और पढ़ें

विवेक तिवारी हत्याकांड।
HighLights
बर्खास्त कांस्टेबल प्रशांत चौधरी गैर इरादतन हत्या का दोषी।
सह-अभियुक्त संदीप कुमार साक्ष्य के अभाव में बरी।
घटना अचानक उत्पन्न परिस्थितियों में हुई, पूर्व उद्देश्य नहीं।
विधि संवाददाता, लखनऊ। बहुचर्चित एपल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड के मामले में गुरुवार को फैसला सुनाते हुए सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने बर्खास्त कांस्टेबल प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है।
घटना के समय प्रशांत के साथ मौजूद दूसरे कांस्टेबल संदीप कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। सजा के बिंदु पर सोमवार को सुनवाई की जाएगी।
मुकदमे के विचारण के दौरान पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने माना है कि मुख्य अभियुक्त प्रशांत चौधरी का पूर्व से मृतक विवेक तिवारी की हत्या करने का कोई उद्देश्य नहीं था।
यह घटना अचानक उत्पन्न परिस्थितियों के अनुरूप घटित हुई है। जिससे प्रशांत चौधरी को हत्या का दोषी नहीं माना जा सकता है। जबकि मामले के सहअभियुक्त कांस्टेबल संदीप कुमार के संबंध में अभियोजन की तरफ से पर्याप्त साक्ष्य का अभाव पाते हुए न्यायालय ने उसे बरी करने जाने का आदेश दिया है।
मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी की ओर से पैरवी कर रहे उनके विशेष अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष बताया कि इस हत्याकांड में सर्वप्रथम मामले की पीड़िता सना खान ने 29 सितंबर 2018 को थाना गोमतीनगर में प्रातः 4.57 को दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने बताया कि घटना वाली रात वो अपने सहकर्मी एपल कंपनी के एएसएम विवेक तिवारी के साथ देर रात लौट रही थीं।
गोमती नगर विस्तार के सीएमएस स्कूल के पास दो अज्ञात पुलिस वालों ने उनकी गाड़ी रोकने की कोशिश की। जब उन लोगों ने डर की वजह से बचने की कोशिश करके गाड़ी निकालने की कोशिश की तो एक पुलिस वाले ने विवेक तिवारी पर गोली चला दी। जिससे कुछ दूर आगे जाकर उनकी मृत्यु हो गई।
इसी मामले में दूसरी रिपोर्ट मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने 30 सितंबर को शाम 6.57 पर कराई थी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति की हत्या पुलिस कर्मी प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार ने की थी। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा अत्यंत वीआइपी क्षेत्र में एक कारपोरेट अधिकारी पर गोली चलाए जाने की इस घटना से व्यापक आक्रोश फैल गया था।
शुरुआत में मामले की जांच लखनऊ पुलिस ने की, बाद में राज्य सरकार ने इसकी करीबी निगरानी की। चूंकि कल्पना तिवारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि घटना के बाद सना खान को पुलिस वालों ने दबाव डालकर बोल-बोल कर लिखवाकर दस्तखत कराए हैं। लिहाजा बाद में दी गई तहरीर को पूर्व में लिखी गई रिपोर्ट में समाहित (शामिल) करते हुए विवेचना की गई।
इस मामले की विवेचना प्रभारी कोतवाली महानगर विकास चंद्र पांडे को सौंपी गई। मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल आठ गवाहों का परीक्षण कराया गया। 26 नवम्बर 2024 को दोनों अभियुक्तों का 313 सीआरपीसी के अंतर्गत बयान दर्ज किया गया। बचाव पक्ष ने भी विचारण के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञों सहित अपनी तरफ से 8 सफाई साक्ष्य पेश किए।
विचारण व आरोप
मामले में अभियुक्त प्रशांत कुमार चौधरी पर दिनांक 22 मार्च 2019 को धारा 302 व 323 में आरोप तय हुआ। वहीं मामले के दूसरे आरोपित संदीप कुमार पर धारा 302 के साथ सपठित धारा 114 व 323 के अंतर्गत आरोप बनाए गए।
