यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विनय पाठक के करीबियों ने कोर्ट के आदेश को ताक पर रख की मनमानी, निजी कालेज के शिक्षक को वीसी बनाया
Vinay Pathak Corruption Case न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर मनमानी की और चहेतों को विनियमित कर दिया। आरोप ...और पढ़ें

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। Vinay Pathak Corruption Case: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने एक संगठित टीम बनाकर सुिनयोिजत तरीके से फर्जीवाड़ा किया। वह डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2021 तक कुलपति रहे। इन छह वर्षों में उन्होंने न सिर्फ एकेटीयू बल्कि उससे संबद्ध सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों पर भी कब्जा बनाए रखा। इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (आइईटी) के निदेशक पद पर मैनेजमेंट के शिक्षक को नियम विरुद्ध बैठाया और फिर अपनी कठपुतली बनाकर प्रयोग किया।
आइईटी के वित्त एवं लेखाधिकारी अभिषेक कुमार त्रिपाठी द्वारा विश्वविद्यालय से लेकर शासन तक को भेजे गए शिकायती पत्र से इसका खुलासा होता है। एकेटीयू के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा द्वारा वित्त अधिकारी की शिकायत पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बनाई कमेटी का गठन किया गया। इन रिटायर जज ने आइईटी में संविदा शिक्षकों के 46 पदों के सापेक्ष 68 पदों पर भर्ती करने और निर्माण में घपले इत्यादि की वित्त अधिकारी की निदेशक प्रो. विनीत कंसल के खिलाफ की गईं शिकायतें तथ्यात्मक, कानूनी व तकनीकी रूप से सही माना।
यही नहीं छात्रावासों में दैनिक मजदूरी पर कार्यरत वार्ड ब्वाय के विनियमितिकरण को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश दिए गए कि इसे विनियमावली व सुसंगत शासनादेसों का अध्ययन कर निर्णय लिया जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर मनमानी की और चहेतों को विनियमित कर दिया। आरोप है कि इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (आइआइटी), दिल्ली से मैनेजमेंट विभाग से एमटेक करने वाले को आल इंडिया काउंसिल फार टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) के नियम के विपरीत निदेशक पद पर बैठाया। यही नहीं करीबी होने के कारण एकेटीयू का प्रतिकुलपति और फिर बाद में खुद पद से हटने पर कार्यवाहक कुलपति की कुर्सी पर बैठा दिया।
सिर्फ घास लगाने में ही नहीं दूसरे बोगस भुगतान पर भी नजरः एकेटीयू में कागजों पर घास लगवाने और फिर उसे उखाड़ने के लिए लाखों का वारा-न्यारा करने के बाद एसटीएफ भी चौकन्नी हो गई है। यह भी सामने आ रहा है कि साफ्टवेयर के नाम पर भी मनमानी रकम का भुगतान हुआ जो वास्तव में विश्वविद्यालय में प्रयोग नहीं हुआ। अब एक-एक फाइल खंगाली जा रही है।
