अंशू दीक्षित, लखनऊ : राजधानी में चल रहे साठ फीसद होटलों के पास विद्युत सुरक्षा निदेशालय से मिलने वाली एनओसी नहीं है, जिनके पास है, उन्होंने एनओसी रीन्यू कराने की जरूरत नहीं समझी। नतीजतन दुर्घटनाएं हो रही हैं। चारबाग, नाका, लाटूश रोड, अमीनाबाद, हुसैनगंज व पुराने लखनऊ में ऐसे होटलों की भरमार है। नियमानुसार हर तीन साल में होटल संचालक को विद्युत सुरक्षा निदेशालय से एनओसी लेनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

चारबाग स्थित एसएसजे इंटरनेशनल और होटल विराट इंटरनेशनल के पास एनओसी को लेकर भी विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अफसर असमंजस में है। डिप्टी डायरेक्टर शत्रुहन सिंह ने बताया कि पिछले एक साल में उनके यहां से एनओसी नहीं जारी की गई। बिजली विभाग के मुताबिक एसएसजे इंटरनेशनल के पास 75 किलोवॉट का कनेक्शन साढ़े छह साल पहले दिया गया था और होटल विराट इंटरनेशनल में 52 किलोवॉट का कनेक्शन साढ़े तीन साल पहले दिया गया था। नियमानुसार बिना एनओसी के सप्लाई शुरू नहीं हो सकती। यानी दोनों होटलों ने शुरू में निदेशालय से एनओसी ली थी, लेकिन उसके बाद रीन्यूवल नहीं कराया। अधिकारी स्वीकारते हैं कि छोटे बड़े सौ से अधिक होटल व लॉज चारबाग में चल रहे हैं। इनमें नब्बे फीसद के पास एनओसी नहीं है। बाक्स

क्या हैं एनओसी के फायदे

टीम जांच के दौरान उन सभी बिन्दुओं को देखती हैं, जहां से आग लगने की संभावना होती है। जांच के दौरान विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अभियंता उन उपकरणों को बदलने के लिए टिप्पणी करते हैं, जिनकी उम्र पूरी हो चुकी होती है। होटल संचालक उन कमियों को जब दूर करवा लेता है तभी टीम एनओसी देती है। बाक्स

फरवरी में 29 होटलों की हुई थी जांच

22 फरवरी को राजधानी में इन्वेस्टर्स समिट से पहले विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने गोमती नगर, सिकंदरबाग, सप्रू मार्ग, हजरतगंज, परिवर्तन चौक, कैंट रोड, हुसैनगंज, आलमबाग, फैजाबाद रोड व कानपुर रोड स्थित 29 होटलों की जांच की थी। वह भी इसलिए क्योंकि समिट में शामिल होने आ रहे अतिथियों को इन होटलों में रुकना था। नियमानुसार प्राइवेट होटल व कंपनियां खुद एनओसी के लिए आवेदन करते हैं। विद्युत सुरक्षा निदेशालय सीधे जांच नहीं कर सकता। आवेदनकर्ता ऑनलाइन आवेदन कर सकता है, निर्धारित समय में जांच के बाद एनओसी जारी की जा रही है। हालांकि पूरी घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं। मौके पर डिप्टी निदेशक की टीम भेजी गई है।

शुभ्रा सक्सेना, निदेशक, विद्युत सुरक्षा निदेशालय।

Posted By: Jagran

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