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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

UP Cabinet Meeting: 1600 मेगावाट क्षमता की ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना को मंजूरी, सस्ती मिलेगी बिजली

By Rajeev DixitEdited By: Vinay Saxena
Published: Tue, 11 Jul 2023 07:46 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना के अंतर्गत 17985.27 करोड़ रुपये की लागत ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक।

HighLights

  1. प्रदेश की होगी पहली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट, सस्ती दर पर मिलेगी बिजली
  2. 800 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां होंगी स्थापित, 50 से 56 माह में शुरू होगा विद्युत उत्पादन

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में विद्युत उत्पादन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के क्रम में योगी सरकार ने सोनभद्र जिले में 1600 मेगावाट क्षमता की ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना के अंतर्गत 17985.27 करोड़ रुपये की लागत से 800 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह राज्य की पहली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट होगी। कैबिनेट बैठक में कुल 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट की प्रौद्योगिकी उन्नत होने के साथ इसकी कार्यक्षमता अधिक होती है। प्लांट में कोयले की खपत अपेक्षाकृत कम होती है। इससे बिजली पैदा करने की लागत कम होती है। उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर बिजली मिलती है। उन्होंने बताया कि बीती फरवरी में हुई यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान राज्य सरकार और एनटीपीसी के बीच ओबरा में एक तापीय परियोजना स्थापित करने का समझौता हुआ था। इसी समझौते के तहत राज्य सरकार ने यह परियोजना सथापित करने का निर्णय किया है।

ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना की स्थापना एनटीपीसी और उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के 50:50 अंशधारिता के संयुक्त उद्यम मेजा ऊर्जा निगम प्राइवेट लिमिटेड (एमयूएनपीएल) के माध्यम से की जाएगी। परियोजना के वित्तपोषण के लिए राज्य सरकार और एनटीपीसी 30 प्रतिशत अंशपूंजी देेंगी और 70 प्रतिशत धनराशि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण ली जाएगी। निर्माण प्रारंभ होने के बाद परियोजना की पहली यूनिट 50 माह और दूसरी 56 महीने में बिजली उत्पादन शुरू कर देगी। परियोजना से पैदा होने वाली शत-प्रतिशत बिजली प्रदेश को मिलेगी। यह परियोजना 500 एकड़ क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। परियोजना के लिए सरकार के पास जमीन उपलब्ध हैं। यदि और जमीन की जरूरत पड़ी तो सरकार उसकी व्यवस्था भी करेगी।

सस्ती मिलेगी बिजली

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में तापीय परियोजनाओं के जरिये लगभग 7000 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। वहीं ओबरा ‘डी’ परियोजना के अंतर्गत स्थापित की जाने वाली दोनों इकाइयों की क्षमता राज्य की मौजूदा विद्युत उत्पादन क्षमता की तकरीबन एक-चौथाई होगी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि परियोजना सथल के पास ही नार्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदान है। इस खदान से परियोजना के लिए कोयला मिलेगा। कोयले की खपत के साथ ढुलाई में भी कम खर्च होने से काफी बचत होगी। फिलहाल हम 5.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदते हैं, जबकि इस परियोजना से 4.79 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद पाएंगे।