लखनऊ [अंशू दीक्षित]। केस एक-रंजीत कुमार बिजली विभाग में अधिशासी अभियंता हैं। इनके भाई की तबीयत बिगड़ी तो उत्तर प्रदेश पॉवर आफीसर्स एसोसिएशन ने टीएस मिश्रा अस्पताल में दौड़ धूप कर भर्ती कराया। यहां कुछ दिन बाद इलाज के दौरान देहांत हो गया। अस्पताल वालों ने एंबुलेंस से शव को अंतिम संस्कार के लिए भैंसाकुंड भेज दिया। इसकी सूचना रंजीत को फोन पर दी गई। बड़े भाई का अंतिम संस्कार कैसे कराए उस वक्त रंजीत ने उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन से संपर्क किया और मदद मांगी। अभियंता अनिल कुमार ने रंजीत की मां व पिता को अस्पताल से लिया और मां को घर छोड़ते हुए सीधे अपनी टीम के साथ भैंसाकुंड पहुंचकर अंतिम संस्कार करवाया।

केस दो-शक्ति भवन में राजीव वर्मा भी अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत है। कोविड से संक्रमित होने के बाद राजीव की जो जाे मदद अपनों को करनी चाहिए वह पीछे हट गए। उस समय एक फोन पर उत्तर प्रदेश पावर आफीसर्स एसोसिएशन खड़ा रहा। टीम के सदस्य वर्मा के घर पानी गर्म करने की केतली, सैनिटाइजर, मास्क व दवाइयां घर जाकर दी। इसी तरह दिल्ली से बस्ती जा रहे तीस लोगों को फैजाबाद रोड पर पहुंचकर जलपान कराया। इसी सूचना एसोसिएशन को सोशल मीडिया के जरिए मिली थी।

केस तीन-आलमबाग में मनीष गौतम के बड़े भाई का कोरोना संक्रमण के चलते देहांत हो गया था। सुबह एसोसिएशन से गौतम ने संपर्क करके शव को उठाने के लिए बांस व अन्य सामग्री मांगी। चंद घंटे में यह सामान उपलब्ध कराया गया। बाजार में बांस व अन्य सामान गौतम को यह सामान नहीं मिल रहा था।

यह चंद उदाहरण है। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के लोग हाइडिल गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 18 से मदद देने का प्रयास कर रहे हैं।जरूरतमंदों को 12 किलो के आक्सीजन सिलेंडर देने के साथ ही दवाइयों, जलपान, सैनिटाइजर, मास्क, भांप लेने के लिए उपकरण भी पहुंचाने का काम टीम कर रही है। एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश व सचिव आरपी केन, अजय व अनिल कुमार जरूरतमंदों के घर अपने निजी वाहनों से पहुंचकर मदद पहुंचा रहे हैं। उनके मुताबिक नियमित रूप से दर्जनों लोगों को जरूरी सामान पहुंचाने का काम जारी है। 

यूपी के हर जिले में सेवा देने का प्रयास: उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश वर्मा कहते हैं कि यूपी के हर जिले में टीमें सक्रिय हैं। राजधानी स्थित मुख्यालय में एक हेल्पलाइन नंबर anu0522 4063265 पर पूरी जानकारी तीमारदार देते हैं। इसके बाद जिलों में कार्यरत सदस्यों को इसकी सूचना दी जाती है और फिर तीमारदार मदद पहुंचाने का काम करते हैं। यह क्रम सुबह 10 बजे शुरू होता है और शाम पांच बजे तक चलता है। उनके मुताबिक कोई भी शख्स मदद मांग सकता है। योग्य डाक्टरों को भी साथ में रखा है। अगर मरीज डाक्टर से बात करना चाहता है तो मुफ्त में सलाह देने का काम भी सदस्य कर रहे हैं।

 

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