जनता से संवाद का तरीका बदलेगी उत्तर प्रदेश पुलिस, अब थाने तक होगा महाकुंभ का अनुभव
उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपनी कार्यशैली में व्यवहार और संवाद को अहम हिस्सा बनाएगी। इसके लिए पुलिसकर्मियों को जनता से ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पुलिस कार्यशैली में व्यवहार और संवाद कौशल को महत्व।
'सक्षम पुलिसिंग' कार्यक्रम में 37 पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण।
महाकुंभ के अनुभव से नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली में अब व्यवहार और संवाद को भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी है। कानून-व्यवस्था संभालने के साथ पुलिसकर्मियों को यह भी सिखाया जाएगा कि जनता से कब, क्यों और कैसे बात करनी है, किस परिस्थिति में सख्त रुख के बजाय सहज संवाद करना है और सामने वाले की बात कैसे सुननी है।
डीजी प्रशिक्षण राजीव सभरवाल ने कहा कि व्यवहार एवं संवाद कौशल से पुलिसकर्मी संवेदनशील, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करेंगे। पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय और टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टिस), मुंबई के सहयोग से 13 से 17 अक्टूबर तक ‘सक्षम पुलिसिंग’ मास्टर ट्रेनर्स क्षमता निर्माण कार्यक्रम चल रहा है। इसमें 37 पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों की एक टीम की रिपोर्ट में पुलिस-जन संवाद और व्यवहार कौशल को और बेहतर करने की जरूरत सामने आई थी। इसी के बाद इस प्रशिक्षण को व्यापक रूप देने की पहल हुई। अधिकारियों के बीच महाकुंभ का उदाहरण भी महत्वपूर्ण रहा।
करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाले आयोजन में पुलिस की भूमिका केवल भीड़ को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि श्रद्धालुओं को रास्ता बताने, उनकी समस्याएं सुनने, बुजुर्गों और महिलाओं की मदद करने तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों को संवाद के जरिए संभालने की भी रही। अब इसी अनुभव को रोजमर्रा की पुलिसिंग का हिस्सा बनाने की तैयारी है।
प्रशिक्षण के लिए सिपाही से लेकर दारोगा, इंस्पेक्टर और डिप्टी एसपी स्तर तक के पुलिसकर्मियों को जोड़ा जा रहा है। करीब 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण से जोड़ा गया है।
ये पुलिसकर्मी अलग-अलग थाना क्षेत्रों में तैनात होकर बाजार, धार्मिक आयोजन, मेले, जुलूस और बड़े क्राउड मैनेजमेंट वाले कार्यक्रमों में ड्यूटी करते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण का असर सीधे थाना क्षेत्र और फील्ड ड्यूटी में दिखाई देने की उम्मीद है।
पहले चरण में तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर्स आगे अन्य पुलिसकर्मियों तक यह प्रशिक्षण पहुंचाएंगे। प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से सुनना, सरल भाषा में संवाद, प्रभावी संचार, आत्म-नियंत्रण, तनाव प्रबंधन, गैर-मौखिक संचार तथा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार जैसे विषय शामिल हैं।
