लखनऊ, (निशांत यादव)। खादी का जिक्र आते ही जेहन में एक खुरदुरे रेशों वाला कपड़ा उभर आता है, जिसकी सदरी बुजुर्ग या पुराने नेता पहने नजर आते थे लेकिन, अब खादी भी सादी नहीं रही। समय के साथ कदमताल करते रंग बदलने वाली खादी ने ब्रांडेड कपड़ों का रंग फीका कर दिया है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुरू हुए उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव में खादी का नया रंग देख लोग हैरान हैं, क्योंकि उन्होंने अब तक वही परंपरागत खादी ही देखी थी जिसके सूत मोटे और चंद रंगों तक ही सीमित थे। खादी अब बदल रही है। बच्चों के लिए डेनिम शर्ट, कुर्ते और बेबी शूट खादी के ही हैं। बड़ों के लिए वूलेन और खादी को मिलाकर गोल गले की रंग बिरंगी और डिजाइनर टीशर्ट नामचीन कंपनियों को मात दे रही हैं। युवाओं की खास पसंद शार्ट कुर्ते भी खादी के नजर आ रहे हैं। शादी और पार्टियों में पहने जाने वाले लांग कुर्ते सिल्क के साथ कॉटन में डिजाइनरों वाले हैं।

लखनऊ चिकनकारी के लिए प्रसिद्ध है लेकिन खादी के कपड़े में हाथ की कलाकारी भी आधुनिकता का परिचय करा रही है। वैसे तो खादी की डेनिम की पैंट कुछ समय पहले ही मार्केट में आ गई थी लेकिन, खादी डेनिम की कई रंगों में पैंट और उसकी फिटिंग आज के फैशन को चार चांद लगाती है। सर्दी के मौसम में हर कोई पार्टी में कोट पहनना पसंद करता है। खादी के पार्टी में पहने जाने वाले कोट भी एक बेहतरीन विकल्प हैं, जबकि नेहरू कोटी भी फैंसी हो गई है। डिजाइन शार्ट हो गया है और रंगों के विकल्प बढ़ गए हैं। घर में इस्तेमाल होने वाली चादरें भी खादी में संवर रही हैं। कई रंगों के साथ अच्छी डिजाइन वाली चादर महोत्सव में लुभा रही हैं। बागपत में बनी इन चादरों को दूसरे देशों को भी निर्यात किया जाता है।

इन दिनों पार्टी में महिलाओं और युवतियों के बीच खास पसंद अनारकली कुर्ता है। यह नामी कंपनियों के साथ बड़े शोरूमों पर मिलता है, लेकिन आकर्षक डिजाइन वाले खादी के भी अनारकली कुर्ते अब तैयार हो गए हैं। इस कुर्ते की डिजाइन बहुत आकर्षक और सूत की गुणवत्ता लाजवाब है। देखकर और छूकर भी यकीन नहीं होता ये वही खादी है।

Posted By: Anurag Gupta