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यूपी में मिलावटखोरों पर योगी सरकार का शिकंजा, 371 करोड़ का जुर्माना और 1388 को सजा

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:43 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ पिछले नौ वर्षों में कड़ी कार्रवाई की गई है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. पिछले नौ वर्षों में 14.49 लाख से अधिक निरीक्षण हुए।

  2. मिलावटखोरों से 371 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया।

  3. न्यायालयों द्वारा 1,388 मिलावटखोरों को प्रभावी सजा दिलाई गई।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। खाद्य पदार्थों में मिलावट और मानकों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेशभर में 14.49 लाख से अधिक निरीक्षण, 2.10 लाख से अधिक छापे, 2.64 लाख से अधिक नमूने लिए गये और कुल 371 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वूसला गया है। इसके अलावा कोर्ट में प्रभावी पैरवी के जरिये 1,388 मिलावटखोरों को सजा दिलाई गयी।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की सचिव एवं आयुक्त डा. रोशन जैकब ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पिछले नौ वर्षों में 14,49,687 निरीक्षण किए जबकि 2,10,688 छापे मारे गये और 2,64,139 नमूने लिए गये।

इनमें से 94,265 नमूने अधोमानक (अधूरे मानक वाले नमूने, लेकिन किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं) मिले। वहीं 19,364 असुरक्षित नमूने (केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ, जो किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक), 24,212 नमूने मिथ्याछाप-नियमों (खाद्य पदार्थों के पैकेट पर पूरी जानकारी न देना अथवा जानकारी के अनुसार खाद्य पदार्थों का न होना) के उल्लंघन वाले एवं 1,37,841 नमूने मानक के अनुसार नहीं पाए गए यानी जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे खाद्य नमूने सामने आए जिनमें गुणवत्ता, सुरक्षा और निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया गया।

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मिलावटखोरों पर एक्शन लेते हुए 1,29,953 वाद एओ कोर्ट (एडीएम कोर्ट) में दायर किए गये, जिसमें से 98,063 वादों में 368.41 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। 17,404 वाद न्यायिक न्यायालय में दायर किये गये, जिसमें 2971 वादों में 2.63 करोड़ का जुर्माना लगाया गया जबकि 1,388 लोगों को सजा सुनाई गयी।

बताया कि वर्ष 2017-18 में जहां 1,35,660 निरीक्षण और 14,115 छापे मारे गये थे, वहीं 2025-26 में निरीक्षण की संख्या 1,57,010 और 32,883 छापे मारे गये।

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