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UPPCL : यूपी में नहीं बढ़े बिजली के रेट, शहरी घरेलू बिजली के दाम 6.50 रुपये प्रति यूनिट ही बनी रहेंगे

अब बिजलीकर्मियों को भी घरेलू श्रेणी का उपभोक्ता माना जाएगा। बिजलीकर्मियों के यहां भी अब अनिवार्य रूप से मीटर लगाए जाएंगे। घरेलू व कृषि उपभोक्ताओं को छोड़कर अन्य के लिए आयोग ने अब 44 पैसे प्रति यूनिट ग्रीन एनर्जी टैरिफ तय किया है। यह टैरिफ सभी के लिए स्वैच्छिक रहेगा।

By Ajay JaiswalEdited By: Mohammed AmmarPublished: Thu, 25 May 2023 09:59 PM (IST)Updated: Thu, 25 May 2023 09:59 PM (IST)
यूपी में नहीं बढ़े बिजली के रेट, शहरी घरेलू बिजली के दाम 6.50 रुपये प्रति यूनिट ही बनी रहेंगे

राज्य ब्यूरो, लखनऊ :   बढ़ती महंगाई के बीच राज्य के 3.30 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर है। चालू वित्तीय वर्ष में भी बिजली की दरें नहीं बढ़ेंगी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए बिजली की मौजूदा दरें यथावत बनाए रखने का ही निर्णय गुरुवार को सुनाया।

घरेलू बिजली की अधिकतम दर 6.50 रुपये यूनिट बनी रहेगी। नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के उपभोक्ताओं की बिजली भी पहले की तरह 10 प्रतिशत सस्ती बनाए रखी गई है। आयोग ने बिजलीकर्मियों को बड़ा झटका देते हुए उनके लिए पहले से चली आ रही अलग श्रेणी को समाप्त कर दिया है।

अब बिजलीकर्मियों को भी घरेलू श्रेणी का उपभोक्ता माना जाएगा। बिजलीकर्मियों के यहां भी अब अनिवार्य रूप से मीटर लगाए जाएंगे। घरेलू व कृषि उपभोक्ताओं को छोड़कर अन्य के लिए आयोग ने अब 44 पैसे प्रति यूनिट ग्रीन एनर्जी टैरिफ तय किया है। यह टैरिफ सभी के लिए स्वैच्छिक रहेगा।

पावर कारपोरेशन प्रबंधन, आयोग द्वारा घोषित टैरिफ आदेश का अब अखबारों में प्रकाशन कराएगा। प्रकाशन से सात दिन बाद नई दरें स्वतः लागू हो जाएंगी। चूंकि दरें यथावत रखी गई हैं इसलिए उपभोक्ताओं के बिजली के बिल में नई दरों का कोई असर नहीं दिखाई देगा।

दरअसल, पांचों बिजली कंपनियों द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए नियामक आयोग में 92,564.89 करोड़ रुपये का एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) दाखिल किया गया था। राजस्व गैप की भरपाई के लिए कंपनियों ने अपनी ओर से 18 से 23 प्रतिशत बिजली की दर बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया था।

गौर करने की बात यह रही की कंपनियों के प्रस्तावों पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व अन्य की आपत्तियों व सुझाव को मानते हुए आयोग ने एआरआर में 6985.38 करोड़ रुपये की कटौती कर बढ़ोतरी के प्रस्ताव को खारिज कर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है।

आयोग ने 15,200 करोड़ रुपये की सब्सिडी मानते हुए जिस तरह से टैरिफ का स्लैबवाइज निर्धारण किया है उससे कंपनियों को लगभग 85,105.59 करोड़ रुपये राजस्व हासिल होगा। वैसे तो आयोग ने मुआवजा कानून के मद में एक हजार करोड़ रुपये पहले अनुमोदित किए थे लेकिन कानून लागू करने में हीला-हवाली के चलते आयोग ने उसमें 50 प्रतिशत की कटौती करते हुए 500 करोड़ रुपये ही मंजूर किए हैं।

आयोग ने जैसा टैरिफ घोषित किया है उससे एक बार फिर किसी भी उपभोक्ता की बिजली महंगी होना तो दूर, आने वाले समय में बिजली की दरें यथावत या फिर कम भी हो सकती हैं। कारण है कि आयोग ने बिजली कंपनियों के मनमाने प्रस्तावों को न मानते हुए उन पर ही उपभोक्ताओं का 7988.81 करोड़ रुपये और सरप्लस निकाल दिया है। विदित हो कि कंपनियों पर पहले से ही 25,133 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं का सरप्लस है।

ऐसे में अब लगभग 33,121 करोड़ रुपये सरप्लस निकलने से आयोग ने कंपनियों के बिजली दर बढ़ाने के प्रस्ताव को न मानते हुए दरें यथावत रखी है। भारी-भरकम सरप्लस से अगले वित्तीय वर्षों में भी बिजली की दरें बढ़ने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। वैसे भी अगले वर्ष लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 2024 में भी बिजली महंगी होने के आसार नहीं हैं।

सितंबर 2019 से लागू हैं मौजूदा दरें

बिजली की मौजूदा दरें सितंबर 2019 से लागू हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद बिजली की दरों में औसतन 11.69 फीसद की बढ़ोतरी की गई थी। पहले कोरोना और फिर विधानसभा चुनाव के मद्देजनर तीन वर्ष से अधिक समय से बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी।

पिछले वर्ष स्लैब में बदलाव से कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं को कुछ राहत भी मिली थी। हालांकि, भारी-भरकम वित्तीय संकट से जूझती कंपनियां इस बार 18 से 23 प्रतिशत तक बिजली की दरों में बढ़ोतरी चाहती थी। घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में ही 18.59 प्रतिशत बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई थी। दरें न बढ़ने से शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की अधिकतम बिजली दर जहां 6.50 रुपये प्रति यूनिट बनी रहेगी वहीं ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की दर 5.50 रुपये प्रति यूनिट तक होगी।

1.39 करोड़ गरीबों की सबसे सस्ती रहेगी बिजली

आयोग ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 19 लाख (बीपीएल) उपभोक्ताओं के साथ ही 1.20 करोड़ लाइफ लाइन उपभोक्ताओं(एक किलोवाट लोड के साथ प्रतिमाह 100 यूनिट तक खर्च करने वाले) की बिजली दरें तीन रुपये यूनिट ही रखी है। ऐसे उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज भी 50 रुपये ही रहेगा।

एनपीसीएल के उपभोक्ताओं को मिलती रहेगी सस्ती बिजली

आयोग ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लगभग डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को मिलने वाली अतिरिक्त राहत को बनाए रखा है। क्षेत्र में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) द्वारा बिजली की आपूर्ति की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2021-22 तक कंपनी का 1176 करोड़ रुपये सरप्लस निकलने पर आयोग ने संबंधित उपभोक्ताओं को उनके फिक्स्ड एवं एनर्जी चार्ज पर पिछले वर्ष 10 प्रतिशत का रेग्यूलेटरी डिस्काउंट घोषित किया है जिसके तहत एनपीसीएल के उपभोक्ता को इस वित्तीय वर्ष में भी उनके कुल बिजली के बिल में 10 प्रतिशत की छूट बरकरार रखी गई है।

बिजलीकर्मियों की खत्म की गई अलग श्रेणी

आयोग ने अबकी टैरिफ आर्डर में बिजली कर्मियों यानी विभागीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की अलग श्रेणी (एलएमवी-10) को खत्म कर दिया है। इन्हें अब घरेलू उपभोक्ताओं की श्रेणी में ही रखा गया है। आयोग ने सभी के यहां अनिवार्य रूप से मीटर लगाने के भी स्पष्ट आदेश दिए हैं। आयोग ने कार्मिकों के घर बिजली खर्च का भार उपभोक्ताओं पर न डालने की हिदायत देते हुए कहा है कि कर्मियों पर होने वाले बिजली के खर्च के लगभग 488.90 करोड़ रुपये को डीम्ड राजस्व माना जाएगा।

कंपनियों को उठाना होगा स्मार्ट मीटर का खर्च

आयोग ने बिजली कंपनियों द्वारा स्मार्ट मीटर पर होने वाले खर्चे को उपभोक्ताओं पर डालने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा है कि कंपनियां अपनी बिल वसूली में सुधार कर मीटर के खर्चे की भरपाई पूर्व में अनुमोदित रोलआउट प्लान के अनुसार करें। कंपनियों को स्मार्ट मीटर लगने से होने वाले लाभ के बारे में भी आयोग को बताना होगा।

खरीदी जाएगी 1.33 लाख मिलियन यूनिट बिजली

आयोग ने वित्तीय वर्ष 2023- 24 के लिए कंपनियों की ओर से दाखिल प्रस्ताव को न मानते हुए 85,579.51 करोड़ रुपये एआरआर को ही अनुमोदित किया है। प्रदेशवासियों को भरपूर बिजली देने के लिए कंपनियों ने प्रस्ताव में 140.95 बिलियन यूनिट बिजली खरीद प्रस्तावित की थी लेकिन आयोग ने 133.45 बिलियन यूनिट ही बिजली खरीदने को मंजूरी दी है।

बिजली चोरी पर लगाना होगा अंकुश

आयोग ने बिजली कंपनियों के 14.90 प्रतिशत वितरण हानियों को भी नहीं माना है। 10.30 प्रतिशत ही हानियां मानते हुए आयोग ने साफतौर पर कहा है कि बिजली चोरी का खामियाजा, ईमानदार उपभोक्ता क्यों भुगते? आयोग ने कंपनियां की तकनीकी व वाणिज्यिक हानियां (एटीएंडसी) को उनके बिजनेस प्लान के अनुसार ही माना है।ऐसे में वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनियों को बढ़ते घाटे को रोकने के लिए बिजली चोरी पर कड़ाई से अंकुश लगाना होगा।

अब दर घटाने की लड़ाई लड़ेगा उपभोक्ता परिषद

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि पहली बार उत्तर प्रदेश में ऐसा हो रहा है कि लगातार चार वर्षों से बिजली की दरें न बढ़ाई गई हों। आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से दरों में कमी का रास्ता भी साफ हो सकता है। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे।

परिषद अध्यक्ष ने कहा कि 25,133 करोड़ रुपये बिजली कंपनियों पर सरप्लस के एवज में उपभोक्ताओं की इस बार बिजली सस्ती हो सकती थी लेकिन कंपनियों द्वारा अपीलेट ट्रिब्यूनल में मुकदमा दाखिल किए जाने से आयोग ने अभी उस पर कोई आदेश नहीं किया है। व

र्मा ने बताया कि अबकी 7,988 करोड़ रुपये और सरप्लस निकलने से अब लगभग 33,121 करोड़ रुपये सरप्लस हो गया है। ऐसे में अगले 10 वर्षों तक दरों में बढ़ोतरी नहीं हो सकती है। वह ट्रिब्यूनल से मामले को निस्तारित कराने के साथ ही बिजली की दर घटाने के संबंध में आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।


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