UPMSCL का बड़ा एक्शन: सरकारी अस्पतालों में बांटी जा रही नकली कैल्शियम की दवा, नोएडा की कंपनी 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) ने नोएडा की अफ्फी पैरेंट्रल्स कंपनी को सरकारी अस्पतालों में नकली कैल्शियम-विटामिन डी-3 ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
यूपीएमएससीएल ने नोएडा की कंपनी को काली सूची में डाला।
सरकारी अस्पतालों में नकली कैल्शियम-विटामिन डी-3 दवा सप्लाई।
कंपनी के दो बैच जांच में नकली पाए गए।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सप्लाई होने वाली कैल्शियम-विटामिन डी-3 की दवा के दो बैच जांच में नकली पाए गए हैं। नियामक प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) ने नोएडा की कंपनी अफ्फी पैरेंट्रल्स को तीन वर्ष के लिए काली सूची में डाल दिया है। खास बात यह है कि कंपनी की इसी दवा के दो से अधिक बैच पहले भी नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (एनएसक्यू) पाए जा चुके हैं।
अफ्फी पैरेंट्रल्स को सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति के लिए कैल्शियम कार्बोनेट विद विटामिन डी-3 (1250 एमजी प्लस 250 आइयू) टैबलेट की आपूर्ति का टेंडर मिला था। कंपनी ने दवा जिला ड्रग वेयरहाउस में पहुंचाई, जहां से इसे अस्पतालों में भी भेजा गया।
दोनों बैच का हुआ निर्माण
यूपीएफडीए की विश्लेषक प्रयोगशाला ने जांच में पीजीटी-241145 बैच को स्प्यूरियस (नकली) घोषित किया। वहीं, पीजीटी25407 बैच को गोरखपुर स्थित यूपीएफडीए प्रयोगशाला ने नकली पाया। दोनों बैच का निर्माण क्रमश: दिसंबर 2024 और मई 2025 में हुआ था।
यूपीएमएससीएल के मुताबिक, इससे पहले भी इसी कंपनी की दवा के दो से अधिक बैच नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी पाए गए थे, जिसके लिए कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी।
यह भी पढ़ें- यूपी के सभी सरकारी कर्मचारियों को पूरे करने होंगे दो कोर्स, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश
टेंडर की शर्तों के मुताबिक, नियामक प्राधिकरण द्वारा किसी आपूर्तिकर्ता की दवा को नकली या मिलावटी घोषित किए जाने पर उसे तीन वर्ष के लिए काली सूची में डाला जा सकता है। इसी प्रविधान के तहत यूपीएमएससीएल के प्रबंध निदेशक उज्ज्वल कुमार ने कंपनी को तीन वर्ष के लिए काली सूची में डालने का आदेश दिया है।
