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'राम ने यादव को मारा... पाठक या बिष्ट को क्यों नहीं', वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर CEO बोले- कंप्यूटर जातिवादी नहीं होते

Published: Tue, 27 Oct 2026 08:43 AM (IST)

विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में अजीबोगरीब नामों पर विवाद के बीच, यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि कंप्यूटर जातिवादी नहीं होते।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा।

HighLights

  1. सीईओ ने मतदाता सूची में गलतियों पर सफाई दी।

  2. आप सांसद संजय सिंह ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए।

  3. फर्जी पर्चियां प्रसारित करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में अजीबोगरीब नाम दर्ज होने को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि कंप्यूटर और साफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में ‘राम ने शर्मा को मारा’ जैसा नाम भी दर्ज है। यदि राम ने किसी अल्पसंख्यक को मारा होता तो निर्वाचन आयोग पर जातिवाद के साथ सांप्रदायिकता का भी आरोप लगता। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी गलतियों के कारणों की जांच की जा रही है और उनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह विवाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की उस टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सवाल किया था कि मतदाता पर्ची में ‘रामहित यादव’ का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हो गया? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा था कि राम ने केवल यादव को ही क्यों मारा? सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय या बिष्ट को क्यों नहीं? क्या कंप्यूटर जातिवादी है या किसी राजनीतिक दल का एजेंडा चला रहा है?

जवाब में सीईओ यूपी के आधिकारिक एक्स हैंडल से कहा गया कि हालिया विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में ‘राम ने शर्मा को मारा’ नाम भी दर्ज है। कार्यालय की ओर से एक मतदाता पर्ची साझा की गई, जिसमें मतदाता का नाम रवि शर्मा और पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ दर्ज था। सीईओ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि गलती स्वीकार है, लेकिन गलती करते समय जाति का भेदभाव नहीं हुआ।

सीईओ ने सोमवार को कहा कि इंटरनेट मीडिया पर कुछ अजीबोगरीब नामों वाली प्रविष्टियां सामने आई हैं। इनके पीछे के कारणों की पड़ताल की जा रही है। साथ ही दावा किया कि कुछ फर्जी मतदाता पर्चियां भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि पर्चियों में जालसाजी करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पोस्ट को टैग करते हुए पूछा, ‘इस हैंडल को कौन चला रहा है?’ उन्होंने टिप्पणी की कि निर्वाचन तंत्र की विश्वसनीयता पहले ही सवालों के घेरे में है और इस हैंडल की गतिविधियां बचे-खुचे भरोसे को भी खत्म कर रही हैं।

इंटरनेट मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मामले में संयत भाषा का प्रयोग किया जाए और बिना अनावश्यक टिप्पणी के केवल तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात रखी जाए।

संजय सिंह बोले फिर तो ‘नई गहराई रेडुआ’ हो जाना चाहिए सीईओ का नाम

संजय सिंह ने मतदाता सूची की गड़बड़ियों का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ और ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ जैसे नाम दर्ज हैं। अंग्रेजी के ‘रामहित यादव’ का हिंदी अनुवाद गलत हुआ है।

यदि इसी फार्मूले पर चला जाए तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का नाम भी ‘नई गहराई रेडुआ’ हो जाना चाहिए। पीलीभीत में 13 हजार समान ईपीआइसी नंबर, बस्ती में सात हजार संदिग्ध मतदाता और सुलतानपुर में एक व्यक्ति द्वारा 26 कथित फर्जी फार्म भरने के मामले सामने आए हैं।

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