यूपी एमएलसी वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हुआ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दी सफाई
UP CEO: मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि सॉफ्टवेयर में अंग्रेजी में टाइप नामों को हिंदी में ट्रांसलिटरेट करना था, लेकिन किसी गड़बड़ी के कारण उनका ट्रांसलेशन हो गया।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा
HighLights
सीईओ ऑफिस का एक्स पर पोस्ट- कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते, यह मानना ठीक है कि हमसे गलती हुई
गलतियों के कारणों की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जा रहे
डिजिटल डेस्क, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ियों के बीच हाल ही में यूपी में हुए एमएलसी चुनावों के दौरान भी मतदाता सूची में कुछ अजीबोगरीब नाम सामने आए। इसको लेकर उत्तर प्रदेश के निर्वाचन आयोग ने सफाई दी है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की मतदाता सूची में हिंदी नामों के गलत ट्रांसलेशन को लेकर विवाद अब एक और अजीब सवाल पर पहुंच गया है। क्या यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के दफ्तर में इस्तेमाल किया जा रहा सॉफ्टवेयर कम्युनल है।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने सवाल उठाया कि सॉफ्टवेयर ने ‘रामहित यादव (Ram hit Yadav)’ नाम को ट्रांसलिटरेशन करने के बजाय उसका ट्रांसलेशन ‘राम ने यादव को मारा’ क्यों कर दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा के दफ्तर ने सफाई दी कि एक दूसरे वोटर के पिता का नाम भी बदलकर ‘राम ने शर्मा को मारा’ हो गया था।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोमवार को कहा कि इन गलतियों के कारणों की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं। यह भी जानकारी मिली है कि कुछ फर्जी वोटर स्लिप वायरल हो रही हैं, जिन्हें कई जाने-माने मीडिया संस्थानों और प्रमुख हस्तियों द्वारा दिखाया या उनका जिक्र किया जा रहा है। इस फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट और वोटर स्लिप का अंतर समझे। आपसे अनुरोध है कि सोशल मीडिया पर मतदाता सूची के संबंध में किसी के द्वारा साझा की गई किसी भी जानकारी को सच मानकर आगे बताने, दिखाने या प्रकाशित करने से पहले, संबंधित अधिकारियों से उसकी पुष्टि कर लें। हमारे अधिकारी किसी भी तथ्यात्मक सवाल का तुरंत जवाब देंगे। रिणवा ने बताया कि काफी नाम में गड़बड़ हुआ है। हमने सॉफ्टवेयर इंग्लिश में लिखे नामों को हिंदी में ट्रांसलिटरेट करने के लिए डिजाइन कराया था, लेकिन गड़बड़ी के कारण उनका ट्रांसलेशन हो गया।
सीईओ ऑफिस का एक्स पर आया है, जिसमें स्वीकार किया गया है कि ‘कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते। यह मानना ठीक है कि हमसे गलती हुई, लेकिन अच्छी बात यह है कि गलती के दौरान भी जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ। पोस्ट में आगे कहा गया कि हमें भगवान का शुक्रिया भी अदा करना चाहिए कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा। वरना जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का आरोप भी लगता।
यह विवाद पिछले हफ्ते शुरू हुआ। तब यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के एक्स अकाउंट ने माना कि उत्तर प्रदेश में पहली बार विधान परिषद चुनावों की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई थी। इस दौरान 14.81 लाख से ज्यादा प्रविष्टियों में से 158 में वोटरों या उनके रिश्तेदारों के नाम अजीब तरीके से दर्ज हो गए। इस अकाउंट ने बताया कि सॉफ्टवेयर में अंग्रेज़ी में टाइप किए गए नामों को हिंदी में ट्रांसलिटरेशन किया जाना था, लेकिन किसी गड़बड़ी के कारण उनका ट्रांसलेशन हो गया।
उदाहरण के लिए, पोस्ट में कहा गया कि अगर किसी वोटर का नाम रामहित यादव था और गलती से नाम ‘Ram hit Yadav’ टाइप हो गया, तो सॉफ्टवेयर ने उसका ट्रांसलेशन ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया। इसमें कहा गया कि ऐसी गलतियों को ठीक करने और उनमें सुधार करने की व्यवस्था थी, लेकिन जहां लोगों ने सावधानी नहीं बरती, वहां ये गलतियां बनी रहीं। दफ्तर ने सफाई दी कि जब भी कोई काम पहली बार किया जाता है, तो उसमें गलतियां होने की संभावना रहती है। संबंधित मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ), जो मंडल आयुक्त थे, और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ), जो जिलाधिकारी थे, दोनों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया।
चुनाव से दो दिन पहले ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के दफ्तर ने एक प्रेस बयान भी जारी किया था। इसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट में किसी वोटर की जानकारी में लिखने या छपाई से जुड़ी छोटी-मोटी गलतियों के आधार पर किसी भी वोटर को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। कहा गया था कि अगर कोई वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्र पहुंचता है और पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी को वोटर लिस्ट में उसके नाम या दूसरी जानकारी में लिखने या छपाई से जुड़ी कोई गलती दिखाई देती है, तो ऐसी स्थिति में वोटर की पहचान की जांच की जाएगी।
