यूपी में पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री के नियम बदले: अब डीलरों को ये सर्टिफिकेट लेना होगा अनिवार्य, 5 साल होगी वैधता
उत्तर प्रदेश में नए और पुराने वाहन डीलरों के लिए एआरटीओ से अधिकृत प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। यह प्रमाणपत्र पांच साल के लिए वैध होगा और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
-1776382583554_m.webp)
एआई जेनेरेटेड तस्वीर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्मेश अवस्थी, जागरण, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब नए और पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों की निगरानी की जाएगी। कार बाजार और बाइक सेल जैसे व्यवसाय करने वाले सभी डीलरों को पंजीकरण प्राधिकारी (एआरटीओ) से एक अप्रैल से अधिकृत प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य किया गया है।
यह प्रमाणपत्र पांच वर्ष तक वैध रहेगा। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) लखनऊ ने इसकी तकनीक विकसित की है, और इसे जल्द ही वाहन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में 26वां संशोधन करके पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए डीलर को अधिकृत करने की प्रक्रिया एक जनवरी 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग ने अधिकृत डीलर आफ रजिस्टर्ड वीकल (एडीआरवी) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है, जिसमें वाहनों की खरीद-बिक्री प्रक्रिया और डीलरों की जवाबदेही को स्पष्ट किया गया है।
डीलरों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, और यह प्रमाणपत्र नए वाहनों के डीलरों की नियमों और शर्तों के अनुसार ही मिलेगा। प्रदेश में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री लंबे समय से हो रही है, लेकिन अब वाहन खरीदने वाले मनचाहे तरीके से वाहन की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत, वाहन स्वामी को अपना वाहन अधिकृत डीलर को सौंपना होगा या आवश्यकता पड़ने पर उसे वापस लेना होगा, और इस प्रक्रिया की सूचना पोर्टल के माध्यम से देनी होगी।
इससे वाहन के कब्जे और उत्तरदायित्व को लेकर कोई संशय नहीं रहेगा। पहले, कार बाजार या बाइक सेल के कथित डीलर बिना उल्लेख किए वाहनों की बिक्री कर देते थे, जिससे कई बार दुर्घटनाओं के मामले में पंजीकृत वाहन स्वामी पर कार्रवाई होती थी।
नई व्यवस्था से ऐसे वाहन स्वामियों को राहत मिलेगी। पोर्टल पर वाहन अपलोड होते ही संबंधित डीलर की जवाबदेही होगी, जिससे सरकार को जीएसटी चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अपर परिवहन आयुक्त राजस्व डॉ. आरके विश्वकर्मा ने बताया कि आठ अप्रैल को एनआईसी ने नई तकनीक का प्रजेंटेशन किया है, और यह व्यवस्था जल्द ही प्रदेशभर में लागू की जाएगी।
