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यूपी TET का संशोधित प्रमाणपत्र जल्द होगा जारी, शिक्षा सेवा चयन आयोग ने कहा- पुराने से न भरें भर्ती फॉर्म

By Vivek RaoEdited By: Shivam Yadav
Published: Wed, 21 Oct 2026 03:56 PM (IST)

टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को जल्द ही संशोधित प्रमाणपत्र मिलेंगे; पुराने गलत प्रमाणपत्रों से आवेदन न करने की सलाह दी गई है।

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HighLights

  1. टीईटी के संशोधित प्रमाणपत्र जल्द ही उपलब्ध होंगे।

  2. टीजीटी 17,740 पदों पर भर्ती विज्ञापन लंबित है।

  3. पुराने गलत प्रमाणपत्रों से आवेदन न करने की सलाह।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने वाले जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में नाम, पता या अन्य विवरण गलत दर्ज हैं, उन्हें जल्द ही संशोधित प्रमाणपत्र उपलब्ध होंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने जागरण विमर्श में पूछे गए सवाल पर यह जानकारी दी।

प्रमाणपत्र में त्रुटि होने पर पुराने प्रमाणपत्र के आधार पर भर्ती का आवेदन फार्म न भरें। टीईटी उत्तीर्ण करीब 20 हजार अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में विभिन्न कारणों से नाम, पता आदि की त्रुटियां रह गई थीं। इन अभ्यर्थियों को संशोधन का मौका मिला था। अब वे संशोधित प्रमाणपत्रों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए ही सहायक अध्यापक (प्राथमिक विद्यालय) भर्ती के विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर की गई है।

प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी)-2026 के तहत 17,740 पदों पर भर्ती का अधियाचन मिलने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं होने के सवाल पर उन्होंने बताया कि कुछ बिंदु शासन स्तर पर निस्तारण के बाद भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अटल आवासीय विद्यालयों और अल्पसंख्यक कालेजों से संबंधित अधियाचन अभी आयोग को नहीं मिले हैं।

वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आए आफलाइन अधियाचन में अभी पदों का पूरा विवरण नहीं मिला है। विधानसभा चुनाव की संभावना और आचार संहिता लागू होने के भर्ती प्रक्रिया पर पड़ने वाले असर पर कहा कि आयोग अपना काम जारी रखेगा। निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आपत्ति या निर्देश मिलता है तो उसका पालन होगा।

तकनीकी के साथ विशेषज्ञों की टीम तैयार करती है प्रश्नपत्र

शिक्षक भर्तियों का नियमित कैलेंडर लागू करने और समय पर विज्ञापन, परीक्षा व परिणाम जारी करने के सवाल पर बताया कि रिक्त पदों की संख्या और शैक्षणिक योग्यता तय करना संबंधित विभागों का काम है। विभागों से अधियाचन मिलने के बाद आयोग उसका परीक्षण कर विज्ञापन जारी करता है। प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए तकनीकी के साथ विशेषज्ञों की टीम लगाई जाती है।

प्रश्नपत्र की गोपनीयता ऐसी है कि आयोग के अध्यक्ष भी चाहें तो उसे पहले से नहीं जान सकते। परीक्षाओं के परिणाम अदालत में विवाद के कारण अटकने के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नपत्र में कोई सवाल गलत होने पर संशोधित उत्तर कुंजी जारी कर अभ्यर्थियों के हित में निर्णय लिया जा रहा है। पुरानी परीक्षाओं से जुड़े कोई बड़े मामले लंबित नहीं हैं।

2013 में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को अदालत में चुनौती दिए जाने से प्रक्रिया रुकने के मामले पर बताया कि कुछ संस्थानों के प्रमुख कार्यवाहक थे। अदालत में आयोग के पक्ष से ही निर्णय आया। शिक्षक भर्ती में पैनल की एक वर्ष की वैधता के सवाल पर कहा कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं होगा।

परीक्षा और परिणाम समय पर जारी करने के संबंध में अध्यक्ष ने बताया कि जिन परीक्षाओं में साक्षात्कार नहीं होता, उनमें लिखित परीक्षा का परिणाम एक माह में घोषित करने का प्रयास रहता है। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में हुई नियुक्तियों और अदालत के निर्देश पर जांच के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि यह पुरानी भर्ती से जुड़ा मामला है। नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का पूरा परीक्षण और पुलिस सत्यापन कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।

जरूरत के अनुसार बदलता है पाठ्यक्रम

बेहतर शिक्षकों के चयन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बनाए रखने के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि पद की प्रकृति के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार होता है। प्रधानाचार्य का पद प्रशासनिक प्रमुख है, इसमें प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप पाठ्यक्रम रखा जाता है।

असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में सामान्य ज्ञान को भी शामिल किया जाता है, जबकि प्राथमिक और जूनियर स्तर के शिक्षकों के चयन में विषय आधारित पाठ्यक्रम होता है। जरूरतों के अनुसार इसमें बदलाव भी होंगे। शिक्षक भर्ती में ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को भी शामिल होने का अधिकार है। इस संबंध में निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। टीजीटी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष करने के सवाल पर कहा कि अधियाचन नहीं मिला है, आयु सीमा तय करना विभाग का विषय है।

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