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यूपी की OBC बेटियों का 'हाथ' थाम रही योगी सरकार, शादी अनुदान योजना से 1.16 लाख परिवारों की दूर हुई चिंता

Published: Thu, 30 Apr 2026 07:32 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार की 'शादी अनुदान योजना' ओबीसी की निर्धन बेटियों के लिए बड़ा संबल ...और पढ़ें

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से ओबीसी बेटियों को मिला आर्थिक सहारा

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से ओबीसी बेटियों को मिला आर्थिक सहारा

HighLights

  1. 1.16 लाख से अधिक बेटियों को मिली आर्थिक मदद।

  2. प्रति लाभार्थी 20,000 रुपये की सीधी सहायता।

  3. आधार प्रमाणीकरण से योजना में पारदर्शिता बढ़ी।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के लिए 'सुरक्षा कवच' के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के निर्धन परिवारों के लिए राज्य सरकार की 'शादी अनुदान योजना' एक बड़ा संबल साबित हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, सरकार ने एक अभिभावक का दायित्व निभाते हुए एक लाख से अधिक बेटियों के हाथ पीले करने में सीधी आर्थिक मदद प्रदान की है। यह योजना न केवल परिवारों का वित्तीय बोझ कम कर रही है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय भी लिख रही है।

मुख्यमंत्री का संकल्प: बेटियों की खुशहाली

योगी सरकार की प्राथमिकता में बेटियाँ सबसे ऊपर हैं। आर्थिक तंगी की वजह से जो परिवार बेटियों की शादी के लिए परेशान रहते थे, उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 1,16,000 से अधिक लाभार्थियों को सहायता पहुँचाई गई है, जिस पर सरकार ने 232 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह भारी-भरकम राशि इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार हर जरूरतमंद तक मदद पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पारदर्शिता के साथ 20,000 की सीधी मदद

योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। सरकार ने भ्रष्टाचार की संभावना को खत्म करते हुए पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली लागू की है, जिसके माध्यम से राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 1 लाख तक है। साथ ही, उम्र की अनिवार्य शर्तों (लड़की 18 वर्ष और लड़का 21 वर्ष) ने प्रदेश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर भी प्रभावी रोक लगाई है।

कमजोर वर्गों को प्राथमिकता और ऑनलाइन सुविधा

सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुलभ बनाया है। साल 2016-17 से यह योजना पूर्णतः ऑनलाइन है, जहाँ शादी की तारीख से 90 दिन पहले या बाद तक आवेदन किया जा सकता है। खास बात यह है कि योजना में विकलांग, विधवा, दैवीय आपदा प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को विशेष वरीयता दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ (BDO) और शहरी क्षेत्रों में एसडीएम (SDM) द्वारा ऑनलाइन सत्यापन के बाद ही धनराशि जारी की जाती है।

आधार प्रमाणीकरण से फर्जीवाड़े पर लगाम

व्यवस्था को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 से आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। आवेदक और उसकी बेटी के आधार लिंक होने से फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो गई है और लाभ केवल असली पात्रों तक पहुँच रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह के अनुसार, इस योजना के जरिए सरकार पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों को न केवल आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन का आधार भी प्रदान कर रही है।