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ई-रिक्शा पर अंकुश की तैयारी, यूपी सरकार ने केंद्र से मांगा बिक्री और रजिस्ट्रेशन नियंत्रित करने का अधिकार

Published: Thu, 10 Sep 2026 05:25 AM (GMT+05:30)Updated: Thu, 10 Sep 2026 07:13 AM (GMT+05:30)

उत्तर प्रदेश सरकार ने ई-रिक्शा की बिक्री और पंजीकरण को नियंत्रित करने का अधिकार केंद्र सरकार से मांगा है। यह ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. यूपी सरकार ने ई-रिक्शा नियंत्रण के लिए केंद्र को पत्र लिखा।

  2. हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद परिवहन विभाग ने समिति बनाई।

  3. मोटरयान अधिनियम में संशोधन से राज्यों को अधिकार मिलेगा।

धर्मेश अवस्थी, लखनऊ। सड़कों पर यातायात और अतिक्रमण का पर्याय बनते जा रहे ई-रिक्शा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से नियमन का अधिकार देने को पत्र लिखा है। लखनऊ सहित बड़े शहरों में तेजी के साथ बढ़ रहे ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी की थी, जिसके बाद परिवहन विभाग ने एक समिति गठित की थी।

इसकी सिफारिश पर परिवहन आयुक्त ने सचिव सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को पत्र भेजकर मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 65 के तहत संशोधन करने के लिए कहा है, ताकि प्रदेश सरकार को वाहनों की बिक्री व पंजीयन नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार मिल सके। साथ ही परिवहन विभाग ने लखनऊ पुलिस आयुक्त को अवैध ई-रिक्शों का संचालन कड़ाई से रोकने का भी निर्देश दिया है।

उत्तर प्रदेश की यह पहल देशभर के उन तमाम शहरों को राहत दे सकती है, जहां ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से ट्रैफिक जाम चुनौती बनता जा रहा है। नियम में संशोधन होने पर सभी राज्यों में ई-रिक्शा का संचालन कानूनी दायरे में आ जाएगा, जिससे सरकारें इनकी संख्या निर्धारित करने के साथ ही दूसरी चीजें भी नियंत्रित कर सकेंगी।

हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के लिए परिवहन आयुक्त ने अपर परिवहन आयुक्त्त राजस्व राजेंद्र कुमार विश्वकर्मा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें राज्य परिवहन प्राधिकरण के अपर सचिव अजय यादव, आरटीओ प्रवर्तन लखनऊ प्रभात पांडेय, परिवहन मुख्यालय के एआरटीओ प्राविधिक कमल जोशी और मुख्यालय की ही यात्री मालकर अधिकारी शैहपर किदवई को सदस्य बनाया था।

कमेटी की सिफारिश है कि अनफिट वाहनों का संचालन रोकने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई तेज की जाए और राज्य सरकार को ई-रिक्शा का पंजीकरण रोकने और शहर में इनकी संख्या निर्धारित करने के लिए नियमावली में संशोधन के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन का कहना है कि बताया, हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नियमावली में संशोधन के लिए पत्र लिखा गया है।

इसलिए मांगना पड़ा अधिकार
हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने 21 अगस्त को लखनऊ में यातायात प्रबंधन से संबंधित सूरज सिंह बिसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी किया था कि राज्य सरकार इस समस्या को लेकर नींद में नहीं रह सकती।

उसे ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और संचालन को नियंत्रित करने के लिए जल्द प्रभावी नीति बनानी होगी। मोटरयान अधिनियम 1988 व केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 में विशिष्ट श्रेणी के वाहनों की बिक्री या पंजीकरण रोकने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। इसीलिए नियमावली में संशोधन कराने का अनुरोध किया गया है।

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